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Thursday, August 6, 2020

शिक्षण - साक्षरता, मानसिकता, आचरण

शिक्षण  से समाज की प्रगति निश्चित है....,. 
घर-परिवार हो या व्यापार, शिक्षित व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी और समझदारी से अपना योगदान देते हुए उन्नति और प्रगति की ओर सदा बढ़ते रहते हैं
परन्तु शिक्षित होने का मतलब क्या होता है? सही मायने में शिक्षित किसे कहते हैं? 

क्या बड़ी बड़ी डिग्रीयाँ हासिल करने से कोई सही मायने में शिक्षित कहलाता है या जीवन में अपनी क्षमता और सामर्थ्य अनुसार शिक्षण हासिल करके आगे बढ़ना सही शिक्षण कहलाता है या फिर वह जिसने साक्षरता का ' क ख ग'  भी नहीं पढ़ा हो किन्तु ईमानदारी और अनुशासन से जीवन की शिक्षा से अपना लक्ष्य हासिल किया हो और दूसरों के लिए मिसाल खड़ी की हो, क्या वह शिक्षण कहलाता है  ? 

इन तीनों पक्षों का अपना अपना अलग नजरिया है - 
सबसे पहले हम उन शिक्षित व्यक्तियों की बात करते हैं जो बड़ी बड़ी डिग्रीयाँ  प्राप्त कर अपनी काबिलियत से अपना अलग मकाम हासिल करते हैं ये जीवन मे खूब तरक्की करते हैं, इज़्ज़त और शौहरत हासिल करते हैं 
अपने देश और परिवार का नाम रोशन करते हैं | इनमें बहुत व्यक्तियों के योगदान से समाज की प्रगति हुई है परंतु कुछ ऐसे भी व्यक्ति हैं जो किसी खास वज़ह - जैसे सफ़लता के गुमान में अपना ज़मीर खो देते हैं और पद प्रतिष्ठा के अहंकार में गलत राह अपना लेते हैं, या कुछ समाज की अपेक्षाओं में खरा न उतर पाने पर हीनता और अवसाद का शिकार हो जाते हैं और कुछ अपनी शिक्षा और क़ाबिलियत का दुरूपयोग कर समाज की प्रगति में रुकावट पैदा करते हैं जैसे अपनी हीन मानसिकता, बेईमानी, भ्रष्टाचार और शोषण चाहे वो निम्न वर्ग का हो या स्त्रियों का  इस्तेमाल कर शिक्षा का अपमान करते हैं |

अब हम उस श्रेणी की बात करते हैं जिसमें व्यक्ति अपनी किसी पारिवारिक मजबूरी या आर्थिक स्थिति के कारण शिक्षा पूरी नहीं कर पाते हैं और बीच में ही छोड़ने के लिए विवश हो जाते हैं इनमें भी दो तरह के लोग पाए जाते हैं पहले वो लोग जो इसे दिल से अपना लेते हैं जो अपने परिवार के काम काज या कोई साधारण नौकरी पाकर संतुष्ट हो जाते हैं और उसी में आगे आगे तरक्की करते जाते हैं और दूसरे वो जो अपने सपने अधूरे होने के कारण या तो बागी बन जाते हैं और गलत काम करके आगे बढ़ते हैं या वो भी जो अपने सपने पूरे नहीं होने पर अपने बच्चों का भविष्य उज्जवल करने के लिए दिन रात मेहनत कर उन्हें आगे बढ़ाते हैं इनमें भी जो रूढ़िवादी या परंपरावादी होते हैं वे समय के साथ नहीं बदलते तो उनकी आने वाली पीढ़ी ही क्रांति और बदलाव लाती है 
इस वर्ग में भी बहुत से लोग बेईमानी भ्रष्टाचार और हुकुमत करने के लिए अपनी मनमानी चलाते हैं तथा समाज की प्रगति में बाधा उत्पन्न करते हैं |

अब एक वर्ग ऐसा भी जो साक्षर नहीं है तथा मजबूर होकर निम्न वर्ग के कार्य करते हैं या परिवार के साथ खेत खलिहान संभालते है या उनके पहले से चली आ रही काम काज की पद्धति अपनाते हैं  इस वर्ग के व्यक्ती अधिकतर सीधे सरल होते हैं तथा अपने काम को नीति पूर्वक करके खुश रहते हैं ये शिक्षित न होते हुए भी समाज से शिक्षा हासिल करते हैं तथा दिन रात मेहनत कर अपने आने वाली पीढ़ी को शिक्षित करने तथा समाज की प्रगति के लिए अनवरत प्रयास करते रहते हैं 
ये समाज के शोषण का शिकार अधिक होते हैं तथा अपनी अज्ञान और परंपराओं से बाहर निकलने के लिए शिक्षण का सहारा लेते हैं और अपनी मानसिकता को समय के साथ बदलने की चाहत भी रखते है |

इन सभी वर्गों का अलग अलग नजरिया होता है  व्यक्ती की मानसिकता भी भिन्न भिन्न होती है |
पर कुल मिलाकर आदमी किसी भी वर्ग का क्यूँ न हो सही शिक्षण वहीं होता है जो समय के साथ समाज में बदलाव के साथ ही समाज की प्रगति में अपना योगदान करता है अपनी मानसिकता खुले विचारों वाली रखता है ऊँच नीच भेद भाव से परे होता है  निम्न वर्ग और नारी का शोषण जहाँ नहीं होता है सभी को आगे बढ़ने देता है अपनी संस्कृति और परंपराओं का सम्मान करते हुए दूसरों की भी उतनी ही इज़्ज़त कर्ता है क्यूँ कि शिक्षा सिर्फ साक्षरता से ही नहीं मानसिकता और आचरण से भी जुड़ी हुई है जो एक अच्छे और प्रगति करते हुए समाज की नीव है |


अलका डांगी