ना बताते हैं ना जताते हैं. ,
बस अनजान बनकर सबका ध्यान रखते हैं
नेपथ्य में खड़े खड़े सबके सपनों को आकार देते हैं
बस अपनी ही ख्वाहिशें को दरकिनार करते हैं
यह पापा न बड़े ही होशियार होते हैं
परिवार के हर सदस्य को आत्मनिर्भर बनाने का निरंतर प्रयत्न करते हैं
फिर भी अपने ही कंधों पर सब के सुख दुःख की जिम्मेदारी का बोझ लेकर फिरते हैं
अपने मस्त मौला स्वभाव और दिलदारी से सभी के दिलों पर राज करते हैं
और अपनी ही भावनाओं को सबसे छुपा कर दिल के किसी कोने में रखते हैं
यह पापा न बड़े ही होशियार होते हैं
सब की चिंता में स्वयं का जीवन दाँव पर रखते हैं
आदर्श बन कर फिर भी मिसाल कायम करते हैं
कभी सख्त बनकर फैसले लेते हैं
तो कभी अपने कोमल मन से लाचार होते हैं
कभी दोस्त बनकर साथ चलते हैं
तो कभी बच्चे बनकर माहौल हल्का करते हैं
परिवार की खुशी के लिए नित नए रूप धरते हैं
दिन रात एक कर अपने आशियाने की हिफाजत करते हैं
यह पापा न बड़े ही होशियार होते हैं
मां की ममता , त्याग , समर्पण की तो हम सदा ही बात करते हैं
और यह पापा न बिना सहानुभूति , बिना प्रशंसा पाए ही पूरा जीवन निस्वार्थ भाव से जी कर मुस्कराते रहते हैं
यह पापा न बड़े ही होशियार होते हैं
अलका डांगी