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Wednesday, November 13, 2024

शब्दों का खेल !

कोई बात नहीं जाने दो , समय के साथ सब ठीक हो जाएगा ! दिल पर मत लो , यह शब्द दिलासा  तो दिलाते हैं ही साथ ही इंसान को इन शब्दों का जब सहारा मिलता है तो वह मजबूत बन जाता है और उसका आत्मविश्वास और भी सशक्त बन जाता है और उसमें घिरकर उठने की शक्ति भी मिलती है | वहीं - अरे ! यह क्या कर दिया ? , इतना भी समझ नहीं आता ! अब क्या होगा आगे ? तुम अपना निर्णय कभी नहीं ले सकते ! वगैरह वगैरह , ऐसे शब्द इंसान के दिल को ठेस तो पहुंचाते हैं ही और उसका आत्मविश्वास भी डगमगा सकते हैं और इंसान अपनी क़ाबिलियत पर खुद ही शक करने लगता है |

शब्दों में इतनी ताकत होती है कि वह आदमी को हिम्मत भी दे सकता है और तोड़ भी सकता है ! इंसान जिसे अपना समझते हैं और जिससे प्रेम करते हैं उसके लिए सदा अनुकूल शब्दों का प्रयोग करने का प्रयत्न करते हैं और उसे प्रोत्साहन देते रहते हैं | वहीं जिससे ईर्ष्या होती है जिन्हें इंसान नापसंद करते हैं , जिसका बुरा चाहते हैं और अंदर से जिसके कारण असुरक्षित भावना से पीड़ित होते हैं उनके लिए वह प्रतिकूल शब्दों का प्रयोग करते हैं और अपने व्यंग्य वाले शब्दों का बाण चलाकर उसकी हँसी उड़ाते हैं,  उसे सबके सामने आहत करने की कोशिश करते हैं  , उसका आत्मविश्वास गिराने की कोशिश करते  हैं और कभी-कभी मन ही मन खुशी की अनुभूति करते हैं | 

वाणी पर संयम और शब्दों का चयन और मौन रहना बहुत कठिन होता है |  कभी- कभी इंसान दिल से साफ और निर्मल होते हुए भी  अपने शब्दों  से किसी को जाने अनजाने आहत कर देते हैं वहीं  ऐसे शातिर इंसान भी होते हैं जो अपने शब्दों में मधुरता घोल कर  माया और कपट से लिप्त मीठे बोल बोलकर अपना मतलब सिद्ध करते हैं | ये भी गलत ही है |

फिर भी हकीकत यही है कि हर इंसान के शब्द और उसकी वाणी से उसकी प्रकृति की पहचान और एक छवि का निर्माण होता है | किसी न किसी रूप में परिवार और समाज के लिए  इंसान के शब्द हितकारी या अहितकारी  भी साबित होते है |

इंसान को जब अपने आराध्य और अपने कर्म पर पूर्ण विश्वास होने लगता है और ईश्वर और उसकी भक्ति के प्रति शत प्रतिशत समर्पण के भाव जागृत होते हैं तभी उसका मन निर्मल और निश्छल बनता है  और उसके शब्द भी उतने ही स्वच्छ , निर्मल , मधुर और संयमित बन सकते हैं जिससे सभी की आत्मा को सुखद एहसास होता है |

अलका डांगी 

Friday, November 8, 2024

एक बेहतरीन कल. !

विकट परिस्थितियाँ 
कशमकश की घड़ियाँ 
उलझती जिंदगियां
               इसका भी कोई हल होगा 
               एक बेहतरीन कल होगा 
अपनों से दूरियाँ 
रिश्तों की मजबूरियाँ 
दिलों की सिसकियाँ 
               कहीं किसी का कोई संबल होगा 
               एक बेहतरीन कल होगा 
हालातों की जुड़ती कड़ियाँ 
जज्बातों को बाँधती बेड़ियाँ 
प्रश्नों की उलझती लडियाँ 
               सुलझाने के लिए मन निश्चित ही प्रबल होगा 
               एक बेहतरीन कल होगा 
परमात्मा से नजदीकियां 
श्रद्धा और भक्ति की नैया 
एक ही है सबका खिवैयाँ 
             जिससे खत्म अंदर का कोलाहल होगा 
             एक बेहतरीन कल होगा 

अलका डांगी