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Thursday, July 29, 2021

जिंदगी की नई शुरुआत

दौड़ती-भागती जिंदगी थोड़ी थम सी जरूर गई है 
पर कहीं जिंदगी की नई शुरुआत भी हुई है ।

कुदरत का करिश्मा , प्रकृति के नियम 
सब के अपने मह्त्व समझ आने लगे हैं 
दूर होकर गुमसुम हो गए थे जो,
वो रिश्ते फिर मुस्कराने लगे हैं 
कुछ गलत हुआ तो कुछ अच्छी बात भी हुई है 
कहीं जिन्दगी की नई शुरुआत भी हुई है ।

नेकी और दरियादिली बन्द दरवाजों की कैद से
खुलकर बाहर आने लगे हैं 
सो रहे थे जिनके ज़मीर, वो भी 
इन्सानियत और मानवता का परचम लहराने लगे हैं 
देर से ही सही आदमी को अपनी पहचान हुई है 
कहीं जिंदगी की नई शुरुआत भी हुई है ।

ये वक़्त का तकाज़ा है जिसमें उलझे हैं हम सभी 
समय के साथ समझदारी से फिर सुलझने लगे हैं 
संयम और आत्मविश्वास के साथ दिलों में 
आशा के अखण्ड दीपक फिर जलने लगे हैं 
साहस और मजबूत इरादों की सदा जीत हुई है 
कहीं जिंदगी की नई शुरुआत भी  हुई है ।

इस वक़्त ने इन्सान को कई नित नई राह भी दिखाई है 
जीवन जीने की कई अद्भुत कला भी सिखाई है
हाँ ! लड़खड़ा गई थी जो जिंदगी,
फिर नए जज़्बे के साथ खड़ी हुई है 
और जिन्दगी की नई शुरुआत हुई है ।


अलका डांगी 









Friday, July 9, 2021

आस्था और विश्वास !

आस्था और विश्वास. !!

प्रभु भक्ति और श्रद्धा है साथ 
मन में भी है अटल विश्वास 
वो सुन रहे हैं सभी की प्रार्थना औऱ पूरी होगी एक दिन भक्तों की अरदास 
चाहे प्रलय हो या हो विकट परिस्थितियों का आभास 
हारकर छोड़ेंगे नहीं कोई भी प्रयास ।

इश्वर के दूत सदा खड़े हमारे आस-पास 
नित नए रूप बदल कर बढ़ा रहें मदद का हाथ 
जहाँ नेकी,  सच्चाई और करुणा का वास 
अदृश्य सही , महसूस हो जाता है उनके होने का एहसास 

चिंता और गम ना शाश्वत है, न कोई संकट अविनाश 
सच्ची आस्था ही हमारी ताकत है और यही हमारा विश्वास 
जिस दिन प्रभु - नाम से  जुड़ जाएगी हमारी हर एक श्वास 
चित्त प्रसन्न हो जाएगा,  मिल जाएगा आत्मिक - सुख में रास  


अलका डांगी 

Sunday, July 4, 2021

सोच बदल कर तो देखो !!

सोच बदल कर तो देखो 
नजरिया बदल जाएगा 

अपनी हर बात सही की जिद्द पकड़ कर अड़े रहते हो 
नई सोच, नए बदलाव पर आपत्ति दिखाकर 
न खुद बदलते हो, न बदलने देते हो 
एक बार तोड़ कर तो देखो अपने सोच की जंजीरों को  मन कितना हल्का हो जाएगा 
सोच बदल कर तो देखो 
नजरिया बदल जाएगा 

हर बात अपने तराजू में तोलते हो 
सही-गलत के दायरे में रखते हो 
परंपरा के नाम पर बदलने से ड़रते हो 
एक बार दिल से अपनाकर तो देखो समाज के हर परिवर्तन को 
जीवन कितना आसान हो जाएगा 
सोच बदल कर तो देखो 
नजरिया बदल जाएगा 

नई सोच को जब मिलतीं है हौसलों की उड़ान 
अस्तित्व में आता है तब कोई नवनिर्माण 
दुनिया की कई मुश्किलों को मिल जाता है समाधान 
एक बार विस्तृत होने तो दो अपने सोच के सीमित दायरे को 
भविष्य उज्ज्वल बन मुस्कुरायेगा 

सोच बदल कर तो देखो 
नजरिया बदल जाएगा 

अलका डांगी