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Friday, April 24, 2026

पृथ्वी !

पृथ्वी. !!
धरती ,  आकाश , सागर और हरियाली अनेक 
सबको एक नजर अपने दिल से तो देख 
पृथ्वी के ये विभिन्न अंग ,प्रकृति की सुन्दर रचना
जिससे जुड़ा इंसान और प्राणी हर एक 
पूरा जीवन आश्रित इन पर, 
फिर भी इनकी सुध नहीं , 
न करते इनकी सही देखरेख 
ना उपयोग में विवेक 
ना आचरण में इनके संरक्षण का उल्लेख 

भूमंडल इसका तप रहा है 
ग्लेशियर धीरे-धीरे पिघल रहा है 
जंगल जलकर खाक हो रहे हैं 
पशु पक्षी लुप्त हो रहे हैं  
आशियाने  उनके समाप्त हो रहे हैं
मौसम के मिजाज बदल रहे हैं 
कट रहे हैं पर्वत., खेत और खलिहान 
पर्यावरण में प्रदूषण का शोर  है 
त्राहि त्राहि मच रही चारों ओर  है 
आज पृथ्वी की रूह काँप रही है 
जैसे कोई अनहोनी को वह भाँप गई है 

क्या हम मानव इस बदलाव से सच में हैं अनजान ?
या फिर अपने कर्तव्य के प्रति ही  हैं बेईमान
कि पृथ्वी की प्राकृतिक संपदा को भी अपना लिया मान
इसके संरक्षण का ना करते कभी आह्वान 
उपभोग-परिभोग में मशगूल 
न रहा इसके अस्तित्व का किसी को कोई भान 
अपनी शक्ति , अपनी सत्ता और सामर्थ्य पर होता बड़ा गुमान
पृथ्वी की धरोहर पर भी अब कब्जा करना चाहता इंसान 
कैसा बन रहा है नादान. !

इस बात से कोई नहीं अनभिज्ञ 
कि हम सब हैं यहाँ कुछ दिन के ही मेहमान
आने वाली पीढ़ी के भविष्य का भी रखना होगा ध्यान 
क्या कर सकते इतना एहसान 
अपने मौज , शोख और स्वार्थ की खातिर 
पृथ्वी की इस अनमोल धरोहर को न पहुँचाएँगे कोई नुकसान 
इसकी रक्षा, इसका बचाव, जिम्मेदारी हमारी ये मान 
और यही इस वक़्त अनिवार्य  ये भी ले तू  जान 
अपना  फर्ज  निभाकर ही चुका सकते धरती माता के इस कर्ज का एहसान 
कि अब हम इंसानों के ही हाथों में है 
पृथ्वी की सुरक्षा की कमान !

अलका डांगी 

Thursday, April 23, 2026

किताब !


किताब. !

किताब ज्ञान का भंडार है
जीवन का क़ीमती उपहार है 
किताब अपने आप में पूरा संसार है 
किताब किसी का जीवन है 
किताब किसी की कहानी 
किताब किसी का शौक है 
किताब में ही बसती किसी की जिंदगानी 
किताब किसी की आत्मकथा 
किताब किसी के जीवन की व्यथा
किताब प्रेम कहानी है 
किताब मौजों की रवानी है 
किताब से किसी का जन्मों का नाता है 
किताब की दुनिया में व्यक्ति कभी खो जाता है  
तो किताब में ही जीवन का गूढ़ रहस्य पा जाता है 
किताब पुस्तकालय की शान है 
लेखक का अभिमान है 
सफलता की कुंजी है 
साक्षरता की पहचान है 

अलका डांगी 


Sunday, April 19, 2026

विमल अंकल

अर्हम 
कविता लिखना एक कला है उस कला में जीवंतता भरना भी एक संजीदगी लगता है इस कार्य में अथक परिश्रम  किया है हमारे परिवार की सदस्य श्रीमती अलका विवेक डांगी ने इन्होंने जब से हमारे परिवार में अपनी गौरवशाली सोच , जिसे सकारात्मकता का रूप देकर धैर्य जैसी शक्ति से अपने आप को बनाया उसमें पूर्ण सहयोगी बना हमारा परिवार एवं पुत्रवत श्री विवेक डांगी |
लंबे समय से अपने आप को धैर्यता से आगे बढ़ाना,  परिवार में विशेष सहनशीलता , सेवा भावना से ओतप्रोत  रखना हमेशा उनका साथ दिया हमारे प्रियनुप्रिय कुमार प्रणव और  कुमारी प्रिशा ने |
सब जिम्मेदारियां को बखूबी निभाते हुए अलका ने अपनी कविताओं में अपनी ओजस्विता को भरने का प्रयास किया यह हमारे लिए और हमारे परिवार के लिए बहुत ही गौरवान्वित है |  इसमें श्रीमान शाह जी श्री शांतिलाल जी डागलिया के परिवार का बहुत आभार जिन्होंने हमें इस रिश्तेदारी से जोड़ा एवं तीन पीढ़ी का संबंध बनाया मैं अपने परिवार की ओर से शुभ आशीष और आशीर्वाद से ओतप्रोत  रखना चाहूंगा श्रीमती अलका विवेक डांगी को जो अनवरत आगे इसी हौसले से बुलंदता लिए अपनी लेखनी में निखारता लिए बढ़ते रहे,  सदा स्वस्थ प्रसन्न रहें 
शुभ आशीष 
विमल कुमार सोनी एवं समस्त परिजन

जिसे मैं मानता अपना परिवार 
जिसे मैं मानता सेवा की प्रतिमूर्ति 
जिसे मैं मानता सहिष्ण सहिष्णुता की प्रतिमूर्ति 
जिसे मैं मानता धैर्यता की प्रति मूर्ति 
जिसे मैं मानता सकारात्मकता की प्रतिमूर्ति 
जिसे मैं मानता समता  की सहजन 
शुभ आकांक्षा आशीर्वाद 
विमल कुमार सोनी एवं परिजन

Saturday, April 18, 2026

विवेक डांगी

सरलता और सादगी की मिसाल , हर समय सबके लिए खड़ी रहने वाली अलका को अपनी किताब का सपना आज पूरा होने जा रहा है उसके लिए अभिनंदन | जिस भी चीज को तुमने अनुभव किया उसे एक कविता का रूप दे दिया , सही सोच और दूर दृष्टि यही काबिलियत ही तुम्हें कविता लिखने के लिए सदा प्रेरित करती रहती है  , तुम जीवन में जितना हो सके उतना लिखती रहो ..पूरी तरह हाउसवाइफ होने के साथ-साथ तुमने अपना यह एक अलग मुकाम बनाया यह काबिले तारीफ है इसी तरह सदा आगे बढ़ती रहो और मैं हमेशा तुम्हारे साथ खड़ा रहूंगा
विवेक डांगी