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Saturday, July 11, 2020

रिश्ते की गरिमा

वो कहते हैं कि हम किसी का दिल नहीं रखते
पर वो कहाँ अब तक हमारे दिल को समझते 
माना कि वो बड़े दिल वाले हैं पर रिश्ते तो हमने भी बखूबी संभाले हैं
वो रिश्ते निभाने के लिए अपनों को दाँव पर रखते हैं 
हम अपनों और रिश्तों की मर्यादा के भँवर में फंसते हैं 
उनका तरीका अलग है, हमे मंजूर है 
पर हम भी कभी अपने तरीके से जी लेते हैं तो इसमें हमारा क्या कसूर है.?
उन्होंने अपने रिश्तों - नातों को निभाकर खूब नाम कमाया 
पर हमने जब भी चाहा सदा उन्हें दूर पाया 
वो हर वक़्त गलत है ऐसा भी हम नहीं कहते 
न उनसे बड़ा बनने की चाहत ही रखते 
पर रिश्ते - नाते निभाते निभाते 
काश  हमारे रिश्ते की गरिमा वो भी कभी समझते 

अलका डांगी 



Thursday, July 9, 2020

एक सलाम कर्मवीर के नाम

आँसू भर आए इन आँखों में
जब धन्यवाद की गूँज थी हर झरोखों में
कर्मवीरो की कर्तव्यनिष्ठा को करते हम सभी सलाम है
 जान हथेली पर रख कर एकजुट करते ये जब अपने काम है 

इनका भी तो कोई परिवार है
फिर भी हर वक़्त सेवा में रहते ये तैयार है
अपने कर्म के प्रति सदा जिम्मेदार है 
इनकी जितनी हौसला अफजाई की जाए उतनी ही कम है
ये सभी आम इंसान सही पर कुछ खास है 
इनसे ही सुरक्षित हर ज़नजीवन हर श्वास है 🙏🙏

अलका डांगी

Tuesday, July 7, 2020

इस बार....

वो सोंधी खुशबु जो आती है पहली बारिश के साथ
वो पहली बारिश जिसमें भीगने की रहती है आस 
इस बार बुझी नहीं वो प्यास 
इस बार अलग है कुछ एहसास... 

वो छोटे-छोटे कदमों को रेनकोट में चलते हुए निहारना 
 रंगबिरंगे छातों का आपस में टकराना 
 बादलों का जमीन पर उतर आना 
इस बार कोई नज़ारा नहीं दिखा खास 
इस बार अलग है कुछ एहसास... 

वो घुटनों तक पानी का भर जाना 
स्कूल और ट्रेन का बंद हो जाना 
वो बारिश में भीगे मन का ऑफिस न जाने का बहाना बनाना 
दोस्तों के साथ मिलकर चाय पकौड़े की दावत ज़माना 
हँसना खेलना, साथ में गुनगुनाना 
इस बार आया नहीं वो रास 
इस बार अलग  है कुछ एहसास... 

इस बार दिलों में अनजाना भय है 
अपनों से मिलने जुलने में भी संशय है 
जाने कहाँ से आया ये प्रलय है 
इस बार  बारिश में ये मन गीला नहीं सुखा रहेगा ये तय है 
इस बार आंखें नम है और मन थोड़ा उदास 
इस बार अलग है कुछ एहसास.... 

अलका डांगी 









पाक कला

पाक कला 

हर पल कुछ नया  बनाते
कभी सीखते कभी सीखाते 
अपने हुनर और काबिलियत से 
रसोई में चार चांद लगाते 
कभी बिगड़ी भी बना देते तो कभी 
बनाते बनाते नए पकवान की खोज कर जाते 
ये कभी रसोई के राजा - रानी, तो कभी मास्टर शेफ कहलाते... 


अपनी पाक कला और हौसला अफजाई से 
रसोई की बढ़ा दी है शान 
छोटी छोटी ट्रिक्स हो या टिप्स 
समझाते हुए बना दिया हर व्यंजन आसान 
पाक कला को रूचिकर बनाया इतना कि 
रसोई बनाने में रम गए अब बच्चे बूढे और जवान 
घर की लाजवाब रसोई और होटल का लज़ीज़ खाना 
कोई नहीं है अब इनके राज से अनजान 
चाहे शौकिया बनाए चाहे बनाए मनपसंद खान पान 
 अपने हाथों से बनाने का लुत्फ उठाकर  
अब घर घर बनने लगे सारे स्वादिष्ट पकवान... 


अलका डांगी