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Thursday, April 30, 2020

हौसलों की उड़ान!!

कौन है जो अदृश्य होकर प्रहार कर रहा है ?
मानव का दुश्मन बन कर संहार कर रहा है
अपनी शक्ति का लोहा मनाने निकला है
यह कुदरती है या मानव - निर्मित ज़लज़ला है

तुम जो भी हो सुन लो!

हौसले हमारे भी बुलंद है ये हम दिखा देंगे
जीवन का यह दौर मुश्किल सही, हम पार लगा लेंगे
हिम्मत और धैर्य से जुड़े हैं हम
सफ़लता का परचम लहरा देंगे 

कर्मवीरो का बलिदान व्यर्थ न होने देंगे 
जब तक है जान साथ हम देंगे 
संयम और एकता का कवच पहन कर
यह जंग भी शान से जीत लेंगे

आशा की नई किरण के साथ
फिर से खुली हवा में साँस लेंगे
भयमुक्त होगी फिर से दिनचर्या
जीवन में नया जोश भर देंगे
रोशनी के साथ आएगी नई बहार
आत्मविश्वास से फिर उड़ान भरेंगे 

अलका डांगी

Thursday, April 2, 2020

एक दस्तक!

दस्तक  !

दिन - रात चलता था जो शहर
अचानक थम सा गया है
बेख़ौफ़, मदमस्त रहता था जो इंसान आज सहम सा गया है
सुरक्षित है अपने ही आशियाने में
फिर भी क़ैदियों की तरह जंजीरों में फंस सा गया है
समय बहुत है सभी के पास
पर वक़्त जैसे रुक सा गया है
सब्र और सावधानी का हो रहा है इम्तिहान
जूझ रहा है जिससे आज सारा जहाँ
मानवता और प्रकृति के साथ खिलवाड का नतीजा
जैसे हर इंसान भुगत सा रहा है
अब भी समय है सम्भल जाना हे मानव! 
जैसे कोई दस्तक देकर चेतावनी दे सा रहा है |

अलका डांगी