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Monday, September 27, 2021

मेरी नन्ही परी

मेरी नन्ही सी परी , देखो कैसी बड़ी हुई जा रही है 
मानो कल की ही बात हो 
रोती  , चीखती, कभी जिद्द पर चढ़ जाती 
जाने कैसे सारी अदाएं ही बदलती जा रही है 

पढ़ाई से थोड़ी कतराती, कभी जी चुराती 
Creativity में कमाल कर जाती 
कभी youtuber बन जाती 
कभी artist बन जलवा दिखती 
इस digital era में सबकी गुरु बन जाती 
नित नए शौक अपनाकर अपनी चंचलता से 
सबके दिलों पर राज करती जा रहीं हैं 
मेरी नन्ही सी परी , देखो कैसे बड़ी होती जा रही है 

दोस्तों की दोस्त, परिवार की जान 
यूँही हँसती खिलखिलाती रहे सदा 
जितनी अच्छी है दिल से 
वैसे ही आगे बढ़ती रहे यही है दिल से दुआ 
अपने हर जन्मदिन के साथ ही नए सपनों और नई उमंगों  को साकार करने जा रही है 
मेरी नन्ही सी परी देखो कैसे बड़ी होती जा रही है |

With lots of love 
   माँ 

 






Saturday, September 25, 2021

बेटी-बेटा !


बेटा - बेटी 

बेटी हो या बेटा  क्यूँ किसी को ज्यादा किसी को कम है आँकना 
दोनों की तुलना कर क्यूँ बसानी किसी के मन में हीन भावना 

दोनों की है अपनी स्वतंत्र पहचान 
अपने अपने सपनों की दोनों  ही भरते उड़ान 
अपने गुणों और क़ाबिलियत से दोनों पाते सम्मान 
दोनों परिवार की जान है और दोनों माता - पिता का है अभिमान

बेटियाँ घर की रौनक है तो बेटे  भी हैं घर की शान 
बेटियाँ गौरव बढ़ाती तो बेटे  भी बढ़ाते है सम्मान 
चंचल चुलबुल होती है बेटियाँ , बिखेरती पूरे घर में अपनी मुस्कान 
बेटों की मस्तियाँ और जिंदादिली जीवन बना देती आसान 
भावुक होकर भावनाओं में बहती है  अगर बेटियाँ 
बेटों में अपनी भावनाओं को छुपाने की कला और होता है व्यवहारिक ज्ञान 

बेटी हो या बेटा दोनों ही स्वस्थ समाज के  हैं आधार 
अपनी अपनी जिम्मेदारी निभाकर पूरा करते अपना व्यवहार 
कोई नहीं भूलता अपना कर्तव्य और अपने संस्कार 
अपनी संस्कृति और जडों से दोनों को होता है उतना ही प्यार  

उनकी तुलना करके क्यूँ बसानी किसीके भी मन में हीन भावना 
बेटी हो या बेटा क्यूँ किसी को ज्यादा किसी को कम है आँकना

अलका डांगी 








Wednesday, September 15, 2021

चंद लम्हे फुर्सत के !

चंद लम्हे फुर्सत के. !!

एक अरसा हो गया फुर्सत के कुछ पल से रुबरु हुए 
तवज्जो नहीं दी जिसे करीब होते हुए 
जाने कहाँ खो गए वो पल हमसे रूठे हुए 
ढूँढ रही हूँ अब उसे , अनदेखा कर दिया था जिसे राह में चलते हुए |

इस कदर अपनी दुनिया में हम मशगूल हुए 
कि बरसों बीत गए अपनी सुध लिए हुए 
फुर्सत के कुछ पल फिर याद आये , जब अपनों की महफ़िल में भी हम तन्हा हुए 
ढूँढ रही हूँ अब उसे , अनदेखा कर दिया था जिसे राह में चलते हुए |

इस बार कोई बहाना नहीं , फुर्सत निकालनी है फुर्सत के कुछ पल जीने के लिए 
हर वो द्वार खोलने है जो बंद कर दिए थे अपने लिए
बेफिक्र हो जाना है फुर्सत को जीवन में अपनाते हुए 
कि फुर्सत का हाथ थाम लेना है बिना हिचकिचाते हुए 
सहेज लेना है अब उसे  , अनदेखा कर दिया था जिसे राह में चलते हुए |

जरूरी है फुर्सत के कुछ पल भी ,सुचारु जीवन चलाने के लिए 
चंद लम्हें फुर्सत के चाहिए हँसने  , खेलने और अपनी रूचि अपनाने के लिए 
कि अपने लिए भी जीना है  ,जिम्मेदारी सारी निभाते हुए 
अब नजरअंदाज करके नहीं  , 
अंदाज बदल के  फुर्सत को गले लगाना है मुस्कुराते हुए |
सहेज लेना है अब उसे , अनदेखा कर दिया था जिसे राह में चलते हुए |

अलका डांगी 








Tuesday, September 14, 2021

हिन्दी- हमारी पहचान!


हिन्दी  -हमारी  पहचान    !

राष्ट्र का सम्मान है हिन्दी 
हमारी पहचान है हिन्दी 
संस्कृति का अनमोल खजाना है 
भारत की आन - बान और शान है हिन्दी  !

स्वर और व्यंजन से जुड़कर निखर जाती 
हर शब्द की गरिमा और बढ़ाती 
कभी कठिन कभी सरल बन जाती 
आपसी सामंजस्य द्वारा सब में घुलमिल जाती हिन्दी 
इसकी सरलता पर हमें गुमान है 
भारत की आन-बान और शान है हिन्दी  !

प्रेम और आदर सत्कार की भाषा  है हिन्दी 
छोटे-बड़े हर संबंध को मधुर बनाकर 
दिलों में प्यार का दीप जलाती है हिन्दी 
भाषा का गौरव बरकरार रखती है हिन्दी 
आर्य संस्कृति का प्रतीक कहलाती है 
अजनबी का भी सत्कार करती है हिन्दी !

इसकी उन्नती के लिए तन-मन कुर्बान है
भारत की आन-बान और शान है हिन्दी  !




अलका डांगी 

Thursday, September 9, 2021

धर्म ..



धर्म है
तो विनय और विवेक है
धर्म है 
तो हर दिल नेक है
धर्म है 
तो शुद्ध विचार और आचार है 
धर्म है 
तो जीवन का उद्धार है 

धर्म मानवता है 
धर्म समभाव है
धर्म दया और करुणा है
धर्म मैत्री भाव है

धर्म में सुख-शांति का एहसास है 
धर्म में संतुष्टि का निवास है 
धर्म में मोह-माया  , छल - कपट नहीं 
धर्म में सच्चाई और सरलता का निवास है 
धर्म में आग्रह नही, धर्म अनेकांत है, 
धर्म की पहचान किसी जाति या मजहब से नहीं 
धर्म कर्तव्यनिष्ठ और शान्त है |


अलका डांगी 

Tuesday, September 7, 2021

डर !

ये डर भी बड़ा निडर है 
दिलो-दिमाग पर हावी होने की 
इसने छोडी न कहीं कोई कसर है 
कभी यूँ ही बेवजह, बेबाक चला आता है 
स्वस्थ तन-मन में बसा लेता अपना घर 
धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत बनाता है 
हावी हो जाता है अदृश्य शक्ति बनकर 
मुश्किल बना देता है जीवन भर का सफर !

कभी हार की तो कभी तकरार की वज़ह बन जाता है 
मंडराता रहता दुःख और चिंता का साया बनकर 
शातिर , चालाक और बड़ा मौकापरस्त होता है 
राज करने लगता है कमजोर और घायल मन पर !

उच्च मनोबल के सामने कभी टिक नहीं पाता 
कोशिश लाख कर के भी हो जाता बेअसर 
आत्मविश्वास और बेफिक्री को दे नहीं सकता टक्कर 
और एक दिन काफूर हो जाता है 
हिम्मत और हौसलों से भरी उड़ान देखकर !

डर तो दस्तक देता है जीवन के हर कदम पर 
सम्भल जाना पहले ही इसकी आहट सुनकर 
भरोसा रखना सदा खुद पर 
गिरकर   ,  थककर  , टूटकर भी 
हावी होने न देना डर को अपने ऊपर 
चलते रहना  , आगे बढ़ना अनवरत होके निडर 
डर से जीत गए तो ख़ुशनुमा होगा जीवन का हर सफर |



अलका डांगी