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Wednesday, December 18, 2024

चुल्हा !

चूल्हा 

रसोई घर की रंगत है 
अग्नि की संगत है 
जलकर सब की भूख शांत करता है 
दिन निकलता है 
हर घर चूल्हा जलता है 

कभी धीमी तो कभी तेज गति 
जरूरत अनुसार लय-ताल बदलता है 
अन्न के हर निवाले में स्वाद भरता है 
दिन निकलता है 
हर घर चूल्हा जलता है 

वार- त्यौहार , प्रसंग अनुसार सदाबहार मचलता है 
अपनों के गम में शोक व्यक्त कर बुझता है 
फिर दिन निकलता है 
हर घर चूल्हा जलता है 

अमीर गरीब हर घर 
गांव  - शहर ,  प्रकृति वही,  पर रूप बदलकर 
सबको चैन से सुला कर ठंडी आह भरता है 
दिन निकलता है 
हर घर चूल्हा जलता है

अलका डांगी 

Sunday, December 1, 2024

सीख !


कुछ सीख लेते हैं संसार से 
कि सर्वोच्च शक्ति के आगे सभी को झुकना है 
कुदरत के नियम और सृष्टि की संरचना में ढलना है
समय के साथ गतिशील रहना है 
संयम और संतोष के साथ सदा जीना है 
सामाजिक और व्यवहारिक आचरण में संतुलन बनाकर रखना है 

कुछ सीख लेते हैं जीवन से 
कि सदाचार का आचरण करना है 
विपरीत परिस्थितियों में भी साहस का परिचय देना है 
ना शोषण करना है ना शोषित होना है 
मुस्कराते हुए कर्तव्य पथ से गुजरना है 

कुछ सीख लेते हैं अंतर्दृष्टि से भी 
कि गम हो या खुशी समता में रहना सीखना है 
अपनों - बेगानों का दर्द  एक समान समझना है 
तर्क-वितर्क से नहीं दृष्टिकोण बदलकर निरंतर आगे बढ़ना है
जिन्दादिली और प्रेम से हर पल  को बेह्तरीन करना है 

कुछ सीख लेते हैं किताबों से 
कि दुनिया में ज्ञान का अनंत भंडार है 
हर क्षेत्र में प्रगति के जिससे खुल जाते सारे द्वार है  
ज्ञान ही मददगार है , ज्ञान ही तारणहार है 
जीवन का सबसे श्रेष्ठ उपहार है

कुछ सीख लेते हैं धर्म और अध्यात्म से भी 
विनय विनम्रता और सरलता से जुड़ा हर ज्ञान अभंग है 
धार्मिक और आध्यात्मिक ज्ञान कराता आत्मा-परमात्मा का संग है 
आत्मा के शुद्ध स्वरूप का चिंतन ही जीवन का महत्वपूर्ण अंग है 
निर्वाण पाना ही हर मन की आखिरी तरंग है |

अलका डांगी 



 


 




Wednesday, November 13, 2024

शब्दों का खेल !

कोई बात नहीं जाने दो , समय के साथ सब ठीक हो जाएगा ! दिल पर मत लो , यह शब्द दिलासा  तो दिलाते हैं ही साथ ही इंसान को इन शब्दों का जब सहारा मिलता है तो वह मजबूत बन जाता है और उसका आत्मविश्वास और भी सशक्त बन जाता है और उसमें घिरकर उठने की शक्ति भी मिलती है | वहीं - अरे ! यह क्या कर दिया ? , इतना भी समझ नहीं आता ! अब क्या होगा आगे ? तुम अपना निर्णय कभी नहीं ले सकते ! वगैरह वगैरह , ऐसे शब्द इंसान के दिल को ठेस तो पहुंचाते हैं ही और उसका आत्मविश्वास भी डगमगा सकते हैं और इंसान अपनी क़ाबिलियत पर खुद ही शक करने लगता है |

शब्दों में इतनी ताकत होती है कि वह आदमी को हिम्मत भी दे सकता है और तोड़ भी सकता है ! इंसान जिसे अपना समझते हैं और जिससे प्रेम करते हैं उसके लिए सदा अनुकूल शब्दों का प्रयोग करने का प्रयत्न करते हैं और उसे प्रोत्साहन देते रहते हैं | वहीं जिससे ईर्ष्या होती है जिन्हें इंसान नापसंद करते हैं , जिसका बुरा चाहते हैं और अंदर से जिसके कारण असुरक्षित भावना से पीड़ित होते हैं उनके लिए वह प्रतिकूल शब्दों का प्रयोग करते हैं और अपने व्यंग्य वाले शब्दों का बाण चलाकर उसकी हँसी उड़ाते हैं,  उसे सबके सामने आहत करने की कोशिश करते हैं  , उसका आत्मविश्वास गिराने की कोशिश करते  हैं और कभी-कभी मन ही मन खुशी की अनुभूति करते हैं | 

वाणी पर संयम और शब्दों का चयन और मौन रहना बहुत कठिन होता है |  कभी- कभी इंसान दिल से साफ और निर्मल होते हुए भी  अपने शब्दों  से किसी को जाने अनजाने आहत कर देते हैं वहीं  ऐसे शातिर इंसान भी होते हैं जो अपने शब्दों में मधुरता घोल कर  माया और कपट से लिप्त मीठे बोल बोलकर अपना मतलब सिद्ध करते हैं | ये भी गलत ही है |

फिर भी हकीकत यही है कि हर इंसान के शब्द और उसकी वाणी से उसकी प्रकृति की पहचान और एक छवि का निर्माण होता है | किसी न किसी रूप में परिवार और समाज के लिए  इंसान के शब्द हितकारी या अहितकारी  भी साबित होते है |

इंसान को जब अपने आराध्य और अपने कर्म पर पूर्ण विश्वास होने लगता है और ईश्वर और उसकी भक्ति के प्रति शत प्रतिशत समर्पण के भाव जागृत होते हैं तभी उसका मन निर्मल और निश्छल बनता है  और उसके शब्द भी उतने ही स्वच्छ , निर्मल , मधुर और संयमित बन सकते हैं जिससे सभी की आत्मा को सुखद एहसास होता है |

अलका डांगी 

Friday, November 8, 2024

एक बेहतरीन कल. !

विकट परिस्थितियाँ 
कशमकश की घड़ियाँ 
उलझती जिंदगियां
               इसका भी कोई हल होगा 
               एक बेहतरीन कल होगा 
अपनों से दूरियाँ 
रिश्तों की मजबूरियाँ 
दिलों की सिसकियाँ 
               कहीं किसी का कोई संबल होगा 
               एक बेहतरीन कल होगा 
हालातों की जुड़ती कड़ियाँ 
जज्बातों को बाँधती बेड़ियाँ 
प्रश्नों की उलझती लडियाँ 
               सुलझाने के लिए मन निश्चित ही प्रबल होगा 
               एक बेहतरीन कल होगा 
परमात्मा से नजदीकियां 
श्रद्धा और भक्ति की नैया 
एक ही है सबका खिवैयाँ 
             जिससे खत्म अंदर का कोलाहल होगा 
             एक बेहतरीन कल होगा 

अलका डांगी 

Tuesday, August 13, 2024

युवा !!


युवा  !

युवा हो तुम 
gen Z कहलाते हो
हर नई technology अपनाते हो
online और work from home का culture समझाते हो 
millennials से मेल खाते हो  
फिर भी कइयों को कम समझ आते हो 
ऐसा अनोखा ज़ज्बा हो तुम 
युवा हो तुम 
multicuisine से  भले लगाव है 
घर के खाने के भी  उतनी ही चाह है 
fitness routine और diet plan से चलते हो 
अपनी health के लिए भी सजग रहते हो 
अपनी अलग दुनिया में भले जीते हो तुम 
संस्कृति की जड़ों को फिर भी सींचते हो तुम 
युवा हो तुम 
practical और rational thinking है तुम्हारी 
परिवार और समाज के प्रति फिर भी समझते हो अपनी जिम्मेदारी 
दुनिया explore करने अकेले चल पड़ते हो 
social networking से सबसे जुड़े रहते हो 
update रहकर देश और समाज को modernisation का महत्व समझाते हो तुम 
शिक्षा ही नहीं हर field में champion रहना चाहते हो तुम 
युवा हो तुम
धर्म-अध्यात्म और विज्ञान को जोड़कर समझते हो 
अंधश्रद्धा और अंधविश्वास नहीं अपनी समझ की दृष्टि से देखते हो 
ऊँच-नीच का भेद मिटाकर हर field में समानता की मिसाल पेश करते हो 
show-off छोडकर सादगी से रहना पसंद करते हो  
बिना किसी गुरूर के मस्तमौला जीवन जीते हो तुम
हमें नाज़ है ऐसी विरल पीढ़ी हो तुम 
युवा हो तुम 

अलका डांगी 











Wednesday, July 17, 2024

जीवन की रीत !!

स्वीकार करना , आगे बढ़ना ही जीवन की रीत है 

इंसान की प्रकृति को 
हर समुदाय की संस्कृति को 
बदलाव की प्रवृत्ति को 
उभरती नौजवान पीढ़ी की वृत्ति को 
आवकार देना ही सच्ची प्रीत है 

स्वीकार करना ,आगे बढ़ना ही जीवन की रीत है 

अपनी बदलती तकदीर को 
नियति की बनाई तस्वीर को 
जैसे प्रकाश वैसे  ही तिमिर को 
बसंत के बाद शिशिर को  
अपनाकर समय के साँचे में ढलना ही समझ की नीत है 

स्वीकार करना , आगे बढ़ना ही जीवन की रीत है 

सुख - शान्ति भरे संसार में 
अचानक उठते तुफान को 
स्वस्थ जीवन में घुसपैठ करती 
बीमारियों के घमासान को 
हर कदम पर परीक्षा लेती 
चुनौतियों के आह्वान को 
सूझ-बूझ की ढ़ाल से डटकर सामना करने में ही संयम की जीत है 

स्वीकार करना , आगे बढ़ना ही जीवन की रीत है 

अलका डांगी 

Saturday, June 15, 2024

पापा. !!

यह पापा न ,  बड़े ही होशियार होते हैं 
ना बताते हैं ना जताते हैं. ,  
बस अनजान बनकर सबका ध्यान रखते हैं 
नेपथ्य में खड़े खड़े सबके सपनों को आकार देते हैं 
बस अपनी ही ख्वाहिशें को दरकिनार करते हैं 
यह पापा न बड़े  ही होशियार होते हैं 

परिवार के हर सदस्य को आत्मनिर्भर बनाने का निरंतर प्रयत्न करते हैं 
फिर भी अपने ही कंधों पर सब के सुख दुःख की जिम्मेदारी का बोझ लेकर फिरते हैं 
अपने मस्त मौला स्वभाव और दिलदारी से सभी के दिलों पर राज करते हैं 
और अपनी ही भावनाओं को सबसे छुपा कर दिल के किसी कोने में रखते हैं 
यह पापा न बड़े ही होशियार होते हैं 

सब की चिंता में स्वयं का जीवन दाँव पर रखते हैं 
आदर्श बन कर फिर भी मिसाल कायम करते हैं 
कभी सख्त बनकर फैसले लेते हैं 
तो कभी अपने कोमल मन से लाचार होते हैं 
कभी दोस्त बनकर साथ चलते हैं 
तो कभी बच्चे बनकर माहौल हल्का करते हैं 
परिवार की खुशी के लिए नित नए रूप धरते हैं 
दिन रात एक कर अपने आशियाने की हिफाजत करते हैं 
यह पापा न बड़े ही होशियार होते हैं 

मां की ममता , त्याग , समर्पण की तो हम सदा ही बात करते हैं 
और यह पापा न बिना सहानुभूति  , बिना प्रशंसा पाए ही पूरा जीवन निस्वार्थ भाव से जी कर मुस्कराते रहते हैं 
यह पापा न बड़े ही होशियार होते हैं

अलका डांगी 



Friday, June 14, 2024

पति देव !!

आज कलम उठाई तो पतिदेव पर कविता बनाई... 😀 

उनपर भी कविता लिखूँ कभी
ये थी उनकी फर्माइश
पर वो तो स्वयं भगवान की अद्भुत रचना है 😀
ये तो उनको ही समझना है 
फिर भी उनके बारे में लिखकर करती हूँ पूरी उनकी ये ख्वाहिश 

सीधे - सरल (उतने भी नहीं 😉) 
हैं दिल के नेक 
नाम है जिनका विवेक 
हँसना, हंसाना, जिंदादिली है उनकी पहचान 
मस्ती मज़ाक से जुड़ी है उनकी हस्ती, बहुत विरले हैं उनके समान 

माता पिता उनके भगवान हैं 
पूरे परिवार में बसी है उनकी जान 
मित्रों के बिना अधूरा उनका जीवन 
इन सभी की खुशी में खुश रहता उनका मन 

मेहनत और लगन से अपनी पहचान आप बनाई 
परिवार और मित्रों में अपनी शान बढ़ाई 
देव, गुरु, धर्म में रखते श्रद्धा अपार 
जिनके आशीर्वाद से खुलते गए कामयाबी के हर द्वार 

आप सदा यूँ ही मुस्काते रहें 
सभी के जीवन में हँसी बिखराते रहें 
आपके जन्‍मदिन पर स्वस्थ और सफल जीवन की शुभकामना करते हैं 
खुशियाँ सदैव आपके कदम चूमें 
यही चाह रखते हैं... 🙏🙏😀

               ❤️अलका डाँगी❤️

Monday, April 8, 2024

स्वस्थ जीवन

स्वस्थ जीवन. !!

कभी intermittent तो कभी keto फास्टिंग 
कभी diet plan तो कभी calories counting
health के लिए सब कुछ apply और try करते हैं 
कभी protein  bar तो कभी protein powder 
विदेशी खाद्य पदार्थ और जीवन शैली 
healthy रहने के लिए superfood हमें आकर्षित करते हैं कभी सब कुछ आजमा कर भी हार जाते हैं 
तो कभी superfit and Healthy का खिताब हासिल करते हैं 
फिर भी खुश नहीं  , हर दिन weighing scale पर चढ़ते हैं 
लाखों advise देते हैं लाखों follow करते हैं 
और फिर भी anxiety और depression में जीते हैं 

पर स्वस्थ जीवन की यह भी एक पहचान  --

अपनी संस्कृति ,  मौसम और तासीर अनुकूल सादगी भरा खान-पान 
स्वयं से प्रेम और सभी का सम्मान 
सूर्य नमस्कार , योग , आसन और ध्यान 
समय पर सोना , समय पर उठना , नियमित चलना
व्रत उपवास करना ,  पाना धार्मिक और आध्यात्मिक ज्ञान 
हँसना - मुस्कुराना , खुशियाँ लुटाना 
तन - मन में ताजगी भर जीवन बना देता आसान
स्वस्थ जीवन की होती यह भी एक पहचान 
हमारे यहां स्वस्थ रहने का अलग है अंदाज 
जिसे अपना रहे कई विदेशी भी आज 
पर हम भीड़ में कहीं खो गए हैं 
health के नाम पर अपनी विरासत से दूर हो गए हैं 
दादी नानी के नुस्खे किताबों में सीमित हो गए हैं 
healthy रहने के लिए अब ये भी try करना होगा 
अपना देश अपनी जीवन-शैली को फिर से दैनिक क्रम में शामिल करना होगा 
अपनी स्वस्थ जीवन-शैली से आने वाली पीढ़ी को भी प्रेरित करना होगा 

अलका डांगी 




Sunday, March 17, 2024

वोट. !!

वोट 

कहीं धर्म के नाम पर सियासत 
तो कहीं पार्टी बदलकर हुकूमत के लिए हो रही कवायद 
कहीं इतिहास के पन्ने पलटे जा रहे हैं 
कहीं आरोप प्रत्यारोप मढ़े जा रहे हैं 
सदियों पुरानी हरकतों पर  आज फिर सवाल किए जा रहे हैं 
ज़ख्म जो भर  चुके थे उन्हें कुरेद कर अपने स्वार्थ साधे जा रहे हैं 
वोट की राजनीति से है सभी को मतलब 
आखिर आम आदमी से किसीको क्या निस्बत 

कहीं पर तानाशाही और कूटनीति जैसी नागवार हरक़त 
और कहीं प्रचार - प्रसार और सोशल मीडिया के  प्रयोग से निरंतर पा रहे बरकत 
नजरअंदाज  करते करोड़ों लोगों की मुश्किलें अनेक 
पकड़ जब रखते हैं सिर्फ अपने  मतलब का मुद्दा एक 
खिलाफ़त की  भी कोई  कर नहीं सकता जुर्रत 
कि हुकूमत के लिए आपस में जुड़ जाती है कई सारी ताकत 

खैर इसका भी एक दिन होगा अंत जरूर 
टूट जाता है एक दिन झूठा अहम और गुरूर 
ये राजनीति है आज इधर तो कल उधर 
कुर्सी के नशे में है अभी सब चूर 
और किसी पर वफादारी का छा रहा सुरूर 
देशभक्ति का वास्ता देकर हो रहा हर कोई मगरूर 
कौन कितना पानी में ये तो आने वाला वक़्त बतायेगा 
बस हमारी स्वतंत्रता और आजादी पर आँच न आने पाए 
इसलिए सोच समझकर अपना कीमती वोट देकर जरूर आइएगा 

अलका डांगी 














 












Tuesday, February 20, 2024

सुखी और आदर्श परिवार. ??

सुखी और आदर्श परिवार  ??


कहते हैं परिवार तभी सुखी कहलाता है जब सब साथ मिलजुल कर रहते हैं और यह भी कहते हैं कि परिवार में आपसी नोक-झोंक और छोटे-मोटे झगड़े और मतभेद चलते रहते हैं इससे रिश्ते और मजबूत बनते हैं और किसी हद तक हम सब इस बात से सहमत भी हैं परंतु इसी बात का एक दूसरा पहलू भी है जब आदमी परिवार में रहकर भी अपना सुख चैन अपनी नींद और कार्य प्रभावित होता हुआ देखता है और दिन-रात दुखी और चिड़चिड़ा रहता है या गुमसुम और खोया रहता तब हमें इसका निवारण करने के लिए दूसरा पहलू भी जानना जरूरी हो जाता है |
लोगों का मानना है कि परिवार में सब अपने ही तो होते हैं तो भला कोई किसी का बुरा कैसे चाह सकता है या किसी का शोषण क्यों करेगा परंतु यह एक ऐसा कड़वा सच है जिसे समझने के लिए कोई तैयार बिरला ही होता है शोषण की शुरुआत कभी-कभी घर से भी होती है जिसे खुद परिवार वाले भी नहीं समझ पाते क्यूँ कि ये अनजाने भी हो सकता है या जानकर भी जिसे स्वीकार करना भी सबके लिए किसी चुनौती से  कम नहीं है  | कभी-कभी माता-पिता बच्चों और घरवालों के शोषण का शिकार होते हैं तो कभी-कभी बच्चे भी माता-पिता  और परिवार के अन्य सदस्यों के शोषण का शिकार हो सकते हैं | यह समाज की ऐसी कुरीति है जो देखकर भी सभी अनदेखा करते हैं और चुपचाप सहन करते चले जाते हैं |
एक सुखी परिवार आदर्श मिसाल हो सकता है और ऐसे बहुत परिवार भी होते हैं जो हमें प्रभावित करते हैं परंतु सभी परिवार आदर्श की मिसाल नहीं हो सकते और इस बात को भी स्वीकार  करना चाहिए | ऐसे भी परिवार होते हैं जहाँ पति  - पत्नी में या माता-पिता भाई-बहन या भाई-भाई और बेटों बेटियों में आपसी कलह होते रहते हैं  यहाँ तक कि मार पीट और मानसिक शोषण भी होते हैं पर फिर भी साथ रहते हैं जिसकी वज़ह बहुत  हद  तक सामाजिक और आर्थिक   ही हो सकती है | 
बहुत  से परिवार संयुक्त जब रहते हैं और  नए रिश्ते और संबंध जुड़ते हैं तब  भी घर के  मौजूदा सदस्यों तथा नए सदस्यों का आपस में व्यवहार और आचरण ही परिवार की खुशी का मापदंड तय करता है | जब एक दूसरे को दिल से अपना नहीं सकते और राजनीति कूटनीति और नियमित कलह होते हैं तब परिवार के संवेदनशील और भावुक व्यक्ती सबसे ज्यादा सहन करते हैं और पीड़ित होते हैं और इसका शिकार होते हैं | और इसी वज़ह से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है | फिर भी हमारा भारतीय समाज तथाकथित संस्कारों का वास्ता देता है और परिवार वाले भी अपने से ज्यादा समाज और लोगों के भय से सब कुछ चुपचाप सहन करते हुए अच्छे परिवार का चित्र या परिकल्पना करते है जो कि एक स्वस्थ समाज और परिवार के सदस्यों के लिए पूरी तरह से नुकसान देह है |
समय रहते परिवार वाले स्वयं अपने निजी फैसले बिना किसी सामाजिक दबाव के सबके हित के लिए कर सर्वसम्मति और समझदारी दिखाएँ यही बडप्पन होता है चाहे किन्हीं वजहों से परिवार से अलग करना या रहना पड़े  परंतु रोज-रोज के कलह क्लेश और मानसिक प्रताड़ना से बच सके और अपना जीवन स्वाभिमान और शांति से गुज़ार सके इसमें ही सबका हित निहित है सिर्फ लोगों को दिखाने के लिए आदर्श परिवार का वास्ता देकर जबरन साथ रहना और सहनशक्ति को दाँव पर रखना कहाँ की समझदारी है. ?
दूर रहकर  भी खुशी से परिवार के सुख-दुःख में साथ खड़ा रहना  , जरूरत पड़ने पर बिना कहे , समझ कर एक दूसरे की मदद करना क्या आदर्श मिसाल नहीं है क्या दूर रहने से परिवार वालों का प्रेम कम हो जाता है या वो एक परिवार नहीं कहलाता  ?  रोज - रोज परिवार की राजनीति और क्लेश कलह से अपना शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य तथा सुख शांति के साथ समझौता करने से बेहतर है दूर रहकर भी परिवार वालों के बीच प्रेम और अपनापन बना रहे और सभी चैन और सुकून की जिंदगी जी सकें |


अलका डांगी 

Thursday, February 15, 2024

जरूरी है !!

आत्मविश्वास जरूरी है 
कार्य सिद्ध करने के लिए 
आंधी तूफान से उबरने के लिए 
आशा और विश्वास की नींव मजबूत करने के लिए

बदलाव जरूरी है 
समाज और परिवार के हित के लिए 
प्रगति और उन्नति के लिए
शांत चित्त और समकित के  लिए 

चलते रहना जरूरी है 
स्वस्थ और निरोगी शरीर के लिए 
स्वावलंबी जीवन के सफर के लिए 
तय मंजिल हासिल करने की डगर के लिए 

शौक होना जरूरी है 
अपना कौशल सँवारने के लिए 
हर पहलू का दृष्टिकोण अपनाने के लिए 
आस्था और मनोबल बढ़ाने के लिए 

दोस्तों और परिवार का साथ जरूरी है 
प्रेम और अपनेपन की ताकत समझने के लिए 
हर हालात से निपटने के लिए 
गिर कर फिर संभलने के लिए 

मुस्कुराना जरूरी है 
सकारात्मक आभामंडल के लिए 
मुश्किल परिस्थितियों में संबल के लिए
प्रसन्नचित्त और प्रफुल्लित अंतर्मन के लिए 


अलका डांगी 
 






Thursday, February 8, 2024

मेरा गाँव

मेरा गाँव आज भी उतना ही हसीन दिखता है 
बेचैन मन को चैन और सुकून का जीवन देता है 

खेत-खलिहान की हरियाली से 
सुबह की लाली और ढलती शाम मतवाली से 
शुद्ध हवा में साँस लेता है 
मेरा गाँव आज भी बेपरवाह होकर जीवन जीता है 
बेचैन मन को चैन और सुकून का जीवन देता है 

चरवाहों के संग चलते भेड़ बकरियों की कतारों से 
पशु पक्षियों की मधुर पुकारों से 
नीम और पीपल के छांव के किनारों से 
पर्वतों और पहाडियों के बीच आशियाना सजता है 
मेरा गाँव आज भी खुले आसमान में अंगड़ाई लेता है 
बेचैन मन को चैन और सुकून का जीवन देता है 

सिर पर छलकता हुआ पानी का घड़ा लेकर चलती मस्त चालों से 
नुक्कड़ पर  लगते गरमागरम चाय के ठेलों से 
सड़कों पर बेफिक्र खेलते बच्चों और बुजुर्गों के आपसी मेलों से 
अपनेपन और सादगी के साथ सरलता से 
मेरा गाँव आज भी इन्सानियत और जिन्दादिली की मिसाल कायम करता है 
बेचैन मन को चैन और सुकून का जीवन देता है 

नदी में बहते चंचल पानी के बहाव से 
तालाब के पानी के ठहराव से 
सादी साग रोटी  के हर निवाले में गाँव की मिट्टी के स्वाद से
हर आत्मा संतृप्त करता है 
मेरा गाँव आज भी मंद गति से चलकर भी खुश रहता है 
बेचैन मन को चैन और सुकून का जीवन देता है 

अलका डांगी