इस बात से भी बिल्कुल अनजान हैं कि इसके पीछे हम अपनी गोपनीयता भी कहीं न कहीं खोते चले जा रहे हैं | एक तरफ इस बात का एहसास है कि मिनटों में हमारा काम घर पर या कहीं पर भी बैठे बैठे पूर्ण कर सकते हैं वहीं यह किसी बड़ी विडंबना से कम नहीं है कि हम इस टेक्नोलॉजी के गुलाम होते जा रहे हैं | अब इंसान का एक दूसरे पर विश्वास कम होता जा रहा है वहीं टेक्नोलॉजी में ज्यादा विश्वास करने लगा है | जहां अपना खालीपन सोशल मीडिया से दूर करने की कोशिश कर रहे हैं वहीं अंदर से खाली होते जा रहे हैं |
आज हम समय और आधुनिकीकरण का वास्ता देकर नई टेक्नोलॉजी के साथ जीना सीख रहे हैं और बहुत हद्द तक यह जरूरी भी है पर इस बात से भी हमें वाकिफ होना चाहिए कि हम किसी पर इतना ज्यादा आश्रित न हो जाए कि उसके बिना हम पंगु हो जाए और हमारा काम ही अटक जाए या फिर हम किसी के गुलाम बन जाए |
सदियों से चली आ रही हमारी परम्पराएँ जैसे किताबों से पढ़ना, उनमे लिखना हमारे दिमाग को भी विकसित करता है और हमारी धरोहर सुरक्षित भी रहती है | इस डिजिटल इरा में जब हम सब कुछ पेनड्राइव , पीडीएफ और हार्ड ड्राइव में सुरक्षित रखते हैं और यह सब चीजें बहुत उपयोगी भी है और जो बहुत कम जगह लेती हैं और बहुत उपयोगी भी साबित हुईं हैं परंतु इसमें सब कुछ डिलीट होने और खो जाने का भय बना रहता है |
ऐसे वक्त में हमारे लिखने की पद्धति बहुत ही सुरक्षित होती है आज भी जो आनंद हमें किताब पढ़ने में मिलता है वह किंडर में नहीं , जो मजा फोटो एल्बम देखने में आता है वह डिजिटल में नहीं | जब हम बैंक जाते हैं , किराने की दुकान जाते हैं या सब्जी फल वगैरह लेने जाते हैं उनसे एक अलग ही आत्मीय व्यवहार बन जाता है वह ऑनलाइन में कहीं घर पर ही कैद होकर रह जाता है | हमारा व्यवहार , हमारी जान - पहचान सब अपनो तक ही सीमित हो गई है | हमारी संस्कृति में हम जरूरत पड़ने पर एक दूसरे की मदद के लिए सदा तत्पर रहते हैं , खैरियत पूछते रहते हैं और अब जब घर से बाहर निकलना ही बंद हो गया तो ना हम हमारे आस पड़ोस में रहने वालों को पहचानते हैं न कोई हमें पहचानता है | इस swiggy , जोमैटो किचन में हमारे लोकल रेस्टोरेंट और होटल का स्वाद और अपनापन कहीं भी महसूस नहीं होता |
ये सही है कि समय के साथ बदलाव बहुत जरूरी है और आधुनिकीकरण बहुत जगह वक़्त की माँग होती है और कई काम आसान कर देता है | परन्तु हमें हमारी आधुनिकता के साथ-साथ अपने क़ीमती धरोहर को भी बचाकर रखना चाहिए और अपनी धरोहर की उतनी ही इज़्ज़त भी होनी चाहिए जिससे हम किसी के गुलाम नहीं बन कर रह जाए और सही मायने में स्वतंत्र और खुशहाल जिंदगी गुजार सके |
अलका डांगी