मानव-अधिकार !!
मानवता का मतलब क्या सही मायनों में समझते हैं ?
अमीर-गरीब , ऊँच-नीच , काले-गोरे के भेदभाव से थोड़ा आगे जरुर बढ़े हैं
फिर भी चाली-चुगली करना, हँसी उड़ाना , नीचे गिराना
इस दलदल से क्या ऊपर उठे हैं ?
मानव अधिकार और हक के नाम पर मोर्चे लेकर खड़े हैं
नारीवाद-पुरुषवाद और सत्तावाद के खिलाफ लड़े हैं
फिर भी मानवता और इंसानियत के पाठ क्या हमने पढ़ें हैं ?
समाज सेवा और मदद के लिए कई कदम चलें है
नाम और शोहरत के लिए कितने रंग बदले हैं
आधुनिकता और समानता के नाम पर सिर्फ अपने मतलब सधे हैं
निःस्वार्थ होकर कब हम अपनों के लिए पीछे हटे हैं ?
हक के लिए बेशक लड़कर इंसान करता अपनी फरियाद है
परंतु सच तो ये है कि
" हर दिल में मानवता " ही मानव अधिकार की बुनियाद है |
अलका डांगी