ये रिश्ते, ये नाते
कुछ हमने बनाए
तो कुछ अपने आप है बन जाते
दिल से दिल के तार जुड़े रहे
तो इनकी अलग है गरिमा
ये तार छूट गए तो
जीवन के लय - ताल है बिगड जाते
प्रेम, विश्वास और बडप्पन
रिश्तों के अनमोल मोती हैं
त्याग और समर्पण के धागे से जुड़
ये और मजबुत है बन जाते
रिश्तों की मान - मर्यादा
उनका गौरव बढ़ाती है
जोर - जबरदस्ती से
ये बोझ है बन जाते
कोई इनके लिए
अपनी जिंदगी दाँव लगाते
तो कोई जीवन भर
इनका मुल्य ही नहीं समझ पाते
ये रिश्ते, ये नाते
ये हँसाते और रुलाते
ये रूठते और मनाते
पर एक दूसरे से दूर नहीं रह पाते
किस्मत वाले होते हैं वो
जो ये अनमोल नजराना पा जाते
अलका डांगी
2 comments:
Wow !
ऐसे सुंदर जुड़े हैं इस कविता के शब्द,
जैसे जुड़े हैं आप और हम सब |
ये आप से जुड़े रिश्ते की नजाकत है
कि हमारे शब्दों में समायी इतनी ताकत है
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