संतों का कर लो समागम
कि आया है पर्व पर्युषण
धर्म की कोरी बातें हुईं बहुत
अब कर लो तन - मन - धन समर्पण
कि आया है पर्व पर्युषण
राग - द्वेष से ऊपर उठना है
तप - ध्यान भी दिल से करना है
वीर - वाणी कर लो अर्जन
कि आया है पर्व पर्युषण
संसार में ही न उलझे रहना
आगम का भी सार है समझना
अंतरात्मा का कर लो दर्शन
कि आया है पर्व पर्युषण
संयम के पथ पर चले हर ज़न
छोड़ कर राग - द्वेष और कर्मों का बंधन
सरल हो जाए सबका अंतर्मन
कि आया है पर्व पर्युषण
भवोभव से मुक्ति मिल जाए
प्रभु - वाणी आत्मसात कर जाए
छु ले प्रभुजी के चरण
कि आया है पर्व पर्युषण
अलका डांगी
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