जानकारी हमें किसी के द्वारा, कहीं भी, कभी भी या अपने तजुर्बे से भी प्राप्त होती है वहीं ज्ञान हमें उस वस्तु-विषय के बारे में गहराई से अध्ययन करके किसी सच्चे गुरु या शिक्षक से प्राप्त होता है | जानकारी एक सीमा तक सीमित रहती है वहीं ज्ञान की कोई सीमा नहीं होती वह तो असीम एवं अपार होता है |
आज लोग अपनी जानकारी को ही ज्ञान समझ बैठने की भूल कर रहे हैं और विडंबना ये है कि अपनी आधी अधूरी जानकारी को ही ज्ञान समझ कर बाँटकर या ज़बर्दस्ती थोप कर अपने आप को विद्वान समझने की भूल कर रहें हैं | वे इस बात से अनजान हैं कि उनकी जानकारी आधी - अधूरी भी हो सकती है या सही - गलत भी हो सकती है | जानकारी से हमारा कार्य शायद रुके नहीं और हमारे कार्य को आगे बढ़ने में थोड़ी मदद भी मिल जाए परंतु सुचारु रुप से कार्य को अंजाम मिले इसकी कोई गारंटी नहीं होती |
यदि आप किसी विषय के ज्ञानी हैं तो आप उसकी सही जानकारी देने में भी समर्थ होते हैं परंतु सिर्फ जानकारी होने से आप उस विषय में ज्ञानी या विद्वान नहीं बन जाते क्यूँ कि अधूरी जानकारी और भी खतरनाक और नुकसानदायक भी साबित हो सकती
है |
जानकारी होना अच्छी बात है पर जानकारी को संपूर्ण ज्ञान समझना खतरनाक हो सकता है |
अलका डांगी
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