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Friday, September 9, 2022

व्यक्ति और व्यक्तित्व

हर व्यक्ति का अपना एक अलग व्यक्तित्व होता है | उसके बात करने और बोलने की भी एक कला होती है , अपनी अलग शैली या अपना एक अंदाज होता है जो उसके व्यवहार और आचरण में झलकता है |
किसी व्यक्ति का बोलने का तौर तरीका तथा उसका आचरण उसका अपना जिंदगी की तरफ का दृष्टिकोण , उसका नजरिया और उसके व्यक्तित्व को दर्शाता है  |  वहीं वक़्त के साथ-साथ जिंदगी का तजुर्बा , इर्दगिर्द का वातावरण तथा परिस्थितियाँ उसके अंदाज , नजरिए और उसके व्यक्तित्व को बहुत हद्द तक  प्रभावित भी करते है | और हर किसी का व्यक्तित्व उसके परिवार और एक पूरे समाज को प्रभावित करता है यह कभी न खत्म होने वाला एक चक्र है जिसका संबंध आपस में एक दूसरे से सदा जुड़ा हुआ है  |

धर्म-प्रेमी, सरल और निर्मल हृदय वाले व्यक्ती विनय विवेक से अपना कार्य करते है उनकी कथनी-करनी भी समान होती है |कटु -वचन और व्यंग्य उनके शब्दकोश में ही नहीं होते | सभी के साथ प्रेम से और विनम्रता से पेश आते हैं, किसी के काम में दखलअंदाजी नहीं करते, तर्क - वितर्क से दूर रहना पसंद करते हैं तथा अक्सर मौन रहकर खुशनुमा और अनुकूल वातावरण बनाये रखतें है | ऐसे व्यक्ति अपने आप से संतुष्ट होते हैं ऐसे व्यक्तित्व बहुत विरले ही होते हैं तथा समाज के लिए वरदान रूप होते हैं  |

अभिमानी और अहंकारी व्यक्ति हर बात में अपनी बात को ऊँचा रखते हैं और सभी उनकी बात से सहमत हो ऐसा प्रयत्न करते है  | वे अपनी तारीफ करना और सुनना पसंद करते हैं यदि उनके सामने किसी और की प्रशंसा हो तो तुरन्त बीच में बात काटकर उसकी बुराई या कोई गलती दिखाकर उसे नीचा उतारने की कोशिश करते हैं | किसीकी भी हँसी उड़ाना, उसे नीचा दिखाना इन सबमें उन्हें आत्मिक संतुष्टि प्राप्त होती है, ऐसे व्यक्तित्व वाले लोग सदा तर्क-वितर्क के लिए तैयार रहते हैं और अपनी बात सही साबित करने में अपनी कामयाबी और खुशी महसूस करते हैं | ये समाज और परिवार की प्रगति में बहुत बड़े बाधक बनते हैं  |

एक बड़ा तबका समाज का उन व्यक्तियों से भरा है जो 
ऊपर से मीठा और अच्छा बोलते हैं पर मन में माया कपट और छल चल रहा होता है | ये बड़े वाक्चातुर्य होते हैं जिन्हें हर कोई नहीं समझ पाता | ये सदा सभी बातों का दोष दूसरों पर डालने के लिए तत्पर रहते हैं और अपनी छवि सही घोषित करने में जुटे रहते हैं | समय और व्यक्ति के अनुसार ये शब्दों का चुनाव कर प्रयोग करते रहते हैं | ऐसे व्यक्तित्व वाले लोगों का पूरा जीवन इसी दाँव पेंच और प्रपंचों में निकल जाता है | ये राजनीति करने में भी माहिर होते हैं और समाज में कुरीतियां और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हैं  |

एक व्यक्तित्त्व होता है पंचायत करने  और दूसरों  को खुश रखने वालों का जिन्हें अपने से ज्यादा दूसरों की जिंदगी में क्या और क्यूँ  चल रहा है उसमें दिलचस्पी रहती है  पूरे गाँव शहर और समाज का जैसे ठेका उन्हीं के पास हो  , सबकी जानकारी हासिल करना तथा इधर उधर करना उन्हें आत्म संतुष्टि देता है | दूसरों की खुशी के लिए ये   कुछ भी करने के लिए तैयार  रहते हैं  और लोगों के चहेते भी होते है  परंतु कभी-कभी दूसरों की मुश्किलों की वज़ह भी बन जाते हैं | ये समाज और परिवार की सिर्फ जरूरत बनकर रह जाते हैं  |

बहुत से शांति प्रिय व्यक्तित्व वाले व्यक्ती भी होते हैं जिन्हें किसी से कुछ लेना-देना नहीं होता बस अपने काम से काम,  चुपचाप अपनी दुनिया में व्यस्त रहते हैं  ये शांत गंभीर और अपनेआप में खुश रहते हैं और तटस्थ रहना पसंद करते हैं | 
शांत व्यक्ती का एक और प्रकार होता है  जैसे शांत पानी बहुत गहरा  होता है वैसे ही कभी-कभी शांत दिखने वाले व्यक्ति के मन की गहराई में  बहुत खलबली और हलचल मच रही होती है |किसी वज़ह से  दिल की बात बाहर नहीं कर पाते और अंदर ही अंदर कुढ़ते रहते हैं  ऐसे व्यक्ति बहुत भावुक या ईर्ष्या से ग्रस्त होते हैं इसलिए मानसिक रोग के शिकार बन जाते हैं या कभी हिंसक भी बन सकते हैं  | 

समाज  और परिवार में ऐसे तथा अन्य कई प्रकार के व्यक्ति रहते हैं और  प्रतिदिन हमारा सामना भी उनसे होता रहता है |  उनकी आलोचना करना या तुलना करना या अपने तराजू में माप कर उन्हें सही-ग़लत साबित करना हमारा मकसद नहीं होना चाहिए | बल्कि  हम पर  और हमारे द्वारा किसी पर गलत और नकारात्मक आचरण का प्रभाव न हो इसके लिए सबसे पहले हमारा कर्तव्य बनता है कि हम अपने व्यक्तित्व को  भली भाँति पहचाने और उसमें निखार और सुधार लाने की कोशिश करे और अपने मन और जीवन को निश्छल,सरल और सादगी पूर्ण बनाए ताकि हमारा व्यक्तित्व किसी अन्य व्यक्ती और उसके जीवन में कठिनाइयों का सबब ना बने | हमारा व्यक्तित्व  और आचरण एक सुखी परिवार और सभ्य समाज की नींव मजबूत करने में सदा सहायक बने यही हमारा प्रयत्न होना चाहिए  |

अलका डांगी 










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