कशमकश की घड़ियाँ
उलझती जिंदगियां
इसका भी कोई हल होगा
एक बेहतरीन कल होगा
अपनों से दूरियाँ
रिश्तों की मजबूरियाँ
दिलों की सिसकियाँ
कहीं किसी का कोई संबल होगा
एक बेहतरीन कल होगा
हालातों की जुड़ती कड़ियाँ
जज्बातों को बाँधती बेड़ियाँ
प्रश्नों की उलझती लडियाँ
सुलझाने के लिए मन निश्चित ही प्रबल होगा
एक बेहतरीन कल होगा
परमात्मा से नजदीकियां
श्रद्धा और भक्ति की नैया
एक ही है सबका खिवैयाँ
जिससे खत्म अंदर का कोलाहल होगा
एक बेहतरीन कल होगा
अलका डांगी
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