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Sunday, April 19, 2026

विमल अंकल

अर्हम 
कविता लिखना एक कला है उस कला में जीवंतता भरना भी एक संजीदगी लगता है इस कार्य में अथक परिश्रम  किया है हमारे परिवार की सदस्य श्रीमती अलका विवेक डांगी ने इन्होंने जब से हमारे परिवार में अपनी गौरवशाली सोच , जिसे सकारात्मकता का रूप देकर धैर्य जैसी शक्ति से अपने आप को बनाया उसमें पूर्ण सहयोगी बना हमारा परिवार एवं पुत्रवत श्री विवेक डांगी |
लंबे समय से अपने आप को धैर्यता से आगे बढ़ाना,  परिवार में विशेष सहनशीलता , सेवा भावना से ओतप्रोत  रखना हमेशा उनका साथ दिया हमारे प्रियनुप्रिय कुमार प्रणव और  कुमारी प्रिशा ने |
सब जिम्मेदारियां को बखूबी निभाते हुए अलका ने अपनी कविताओं में अपनी ओजस्विता को भरने का प्रयास किया यह हमारे लिए और हमारे परिवार के लिए बहुत ही गौरवान्वित है |  इसमें श्रीमान शाह जी श्री शांतिलाल जी डागलिया के परिवार का बहुत आभार जिन्होंने हमें इस रिश्तेदारी से जोड़ा एवं तीन पीढ़ी का संबंध बनाया मैं अपने परिवार की ओर से शुभ आशीष और आशीर्वाद से ओतप्रोत  रखना चाहूंगा श्रीमती अलका विवेक डांगी को जो अनवरत आगे इसी हौसले से बुलंदता लिए अपनी लेखनी में निखारता लिए बढ़ते रहे,  सदा स्वस्थ प्रसन्न रहें 
शुभ आशीष 
विमल कुमार सोनी एवं समस्त परिजन

जिसे मैं मानता अपना परिवार 
जिसे मैं मानता सेवा की प्रतिमूर्ति 
जिसे मैं मानता सहिष्ण सहिष्णुता की प्रतिमूर्ति 
जिसे मैं मानता धैर्यता की प्रति मूर्ति 
जिसे मैं मानता सकारात्मकता की प्रतिमूर्ति 
जिसे मैं मानता समता  की सहजन 
शुभ आकांक्षा आशीर्वाद 
विमल कुमार सोनी एवं परिजन

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