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Monday, August 12, 2019

तारीफ़

एक वक़्त था जब
तारीफ के लिए तरसते थे
हर लफ्ज़ तारीफ का सुनकर
हम और निखरते थे
अब तारीफ से डर लगता है
जाने क्यूँ तारीफ का हर शब्द अखरता है

तारीफ का एक अंदाज होता है
सच्चे दिल से करे तो
अपनेपन और खुशी का एहसास होता है
हर उम्र में रहती है इसकी चाहत
बढ़ाती है सबकी निगाह में इज़्ज़त

तारीफ तो हौसला अफजाई है
किसी के मेहनत की कमाई है
काबिल लगे तो जरूर व्यक्त कीजिए
पर झूठी तारीफ कर खुशामदी न कीजिए

तारीफ कार्य की शान बढ़ाती है
हर व्यक्ती को सम्मान दिलाती है
बेवजह इसकी महत्ता कम न हो जाए 

बेशक! जहाँ , जितनी , जिसको जरूरत है उतनी जरूर पा जाए 

आखिर तारीफ की भी तो अपनी मर्यादा होती है        

किसी व्यक्ति का प्रोत्साहन और कार्य की प्रशंसा इसमें निहित होती है                                                

इसका गौरव बरकरार रहेगा तब तक 

जब तक ये स्वार्थ से नहीं, प्रेम और दरियादिली से जुड़ किसीके हित में होती है 

अलका डांगी

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