भावनाओं को अपनी तुम व्यक्त कर लो
दिल में मच रहा हो अगर कोई तुफान
बन के न रहो उससे अनजान
जल्द कर लो उसकी पहचान
इससे पहले कि वो करने लगे तुम्हें परेशान
बस थोड़ी सी तुम हिम्मत कर लो
भावनाओं को अपनी तुम व्यक्त कर लो
क्या पता तुम्हारी फिक्र को पड़ाव मिल जाए
कहीं ममता के आँचल की छांव मिल जाए
मुश्किल लगते थे जो प्रश्न उनका हल मिल जाए
कठिन थी जो जिंदगी सरल बन जाए
बस साझा करलो, तुम जताने की मशक्कत कर लो
भावनाओं को अपनी तुम व्यक्त कर लो
सफलता असफलता जीवन के पड़ाव हैं
जैसे आती कभी धूप कभी छांव है
खुशियां है कभी तो कभी तनाव है
कभी अपनापन तो कभी अलगाव है
पर हर हाल को अपनाकर जीवन मदमस्त कर लो
भावनाओं को अपनी तुम व्यक्त कर लो
खूबसूरत सी जिंदगी में ऐसे रम जाओ
स्वयं खुश रहो औरों में ख़ुशियाँ लुटाओ
चाहे मनचाहा पाओ या न पाओ
हर पल जीवन का सार्थक बनाओ
जिंदादिली से जीने के प्रयास अनवरत कर लो
भावनाओं को अपनी तुम व्यक्त कर लो
अलका डांगी
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