कभी न मिलने वाली सुर - लय - ताल है
स्वार्थी दुनिया ने बनाई इसे अपनी ढाल है
शतरंज की जैसे हर पल बदलती चाल है
घर में अपना सिक्का जमाने के लिए
दफ्तर में इज़्ज़त बढ़ाने के लिए
समाज में शौहरत कमाने के लिए
दाँव लगाते सालों साल है
राजनीति भी कैसी कमाल है
दुनिया पर राज करने के लिए
सबका सरताज बनने के लिए
तख्तों ताज पर बने रहने के लिए
पहन लेते ऐसी कठोर खाल है
राजनीति भी कैसी कमाल है
बेईमानी पर ईमानदारी का नकाब चढ़ाने के लिए
झूठ पर सच का मुखौटा लगाने के लिए
कूट नीति के दाँव पेंच आज़माने के लिए
निकाल लेते बाल की खाल है
राजनीति भी कैसी कमाल है
ये रास्ता आसान नहीं चलने के लिए
वक़्त लगता है इसे समझने के लिए
दूर रहना सदा इस चक्रव्यूह से बचने के लिए
कर देती ये जीना बेहाल है
राजनीति भी कैसी कमाल है
अलका डांगी
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