कौन है जो अदृश्य होकर प्रहार कर रहा है ?
मानव का दुश्मन बन कर संहार कर रहा है
अपनी शक्ति का लोहा मनाने निकला है
यह कुदरती है या मानव - निर्मित ज़लज़ला है
तुम जो भी हो सुन लो!
हौसले हमारे भी बुलंद है ये हम दिखा देंगे
जीवन का यह दौर मुश्किल सही, हम पार लगा लेंगे
हिम्मत और धैर्य से जुड़े हैं हम
सफ़लता का परचम लहरा देंगे
कर्मवीरो का बलिदान व्यर्थ न होने देंगे
जब तक है जान साथ हम देंगे
संयम और एकता का कवच पहन कर
यह जंग भी शान से जीत लेंगे
आशा की नई किरण के साथ
फिर से खुली हवा में साँस लेंगे
भयमुक्त होगी फिर से दिनचर्या
जीवन में नया जोश भर देंगे
रोशनी के साथ आएगी नई बहार
आत्मविश्वास से फिर उड़ान भरेंगे
अलका डांगी
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