अपने ही कर्मों का हिसाब-किताब है जिंदगी
मानो तो कठिन समझो तो सरल
दिल से जियो तो बेहिसाब है जिंदगी
हर पन्ना जैसे खुली किताब है जिंदगी
दिल पर ले लिया तो तनाव है जिंदगी
हँसते मुस्कराते चल पड़े तो अल्हड,चंचल बहाव है जिंदगी
थोड़ी उलझी , थोड़ी सुलझी
बनतीं - बिगड़ती , संवरती - निखरती
नित नए रंग ढ़ंग बदलती
उतार-चढाव , धूप-छांव से गुजरती
जीने की चाह हो तो बेपनाह है जिंदगी
अपनों का साथ हो तो प्रेम और प्रीत का अंबार है जिंदगी
ग़म के साये भी है तो खुशियों का संसार है जिंदगी
कभी हकीकत दर्शाती कभी ख्वाब सजाती
ख्वाहिशों और तमन्नाओं का भंडार है जिंदगी
हर पल , हर क्षण की अहमियत समझाती
सम्पूर्ण जीवन का सार है जिंदगी
अलका डांगी
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