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Tuesday, October 26, 2021

कर्त्तव्य बोध

हाँ ! वो बुजुर्ग हैं 
वो ज्येष्ठ नागरिक हैं 
तो क्या हुआ 
वो भी सीने में जवान दिल रखते हैं 
जीवन की रफ्तार थोड़ी धीमी जरूर हो गई 
पर आज भी हँसने खेलने और मिलने झूलने के लिए उनके दिल उतने ही धड़कते हैं 

हाँ  !  वो सेवा निवृत्त हुए है
तो क्या हुआ 
कहीं और प्रवृत्त हुए हैं 
जिम्मेदारी के बोझ तले दबे हुए कुछ अधुरे ख्वाब, कुछ ख्वाहिशों को पूरा करने की मंशा रखते हैं 
किसी प्रकार अपने आप को व्यस्त रखने की हर संभव कोशिश करते हैं 
स्वस्थ और खुशहाल जीवन जीने की जद्दोजहद करते हैं 

 हाँ ! वो थक गए है 
कंधे थोड़े झुक गए हैं 
तो क्या हुआ 
जीवन भर की कड़ी मेहनत और उतार-चढाव के बाद शान से जीने का हक रखते हैं 
अपने तजुर्बे और मशवरो से सभी का मार्गदर्शन करते हैं 
परिवार और रिश्तों के लिए सब कुछ समर्पण करते हैं 

हाँ   !  वो बीमार है 
हालात से लाचार है 
कभी शिकायत, कभी चिड़चिड़ करते हैं 
तो क्या हुआ 
दो प्रेम के शब्द और कुछ वक़्त अपनों के साथ बिताने के लिए तरसते हैं 
और कहीं किसी पर बोझ न बन जाए 
इसलिए दिन-रात स्वस्थ रहने का भरसक प्रयत्न करते हैं 

हाँ  ! वो हमसे कुछ आशा कुछ उम्मीद रखते हैं 
अपने दुख - दर्द और लाचारी सुनी निगाहों से बयान करते हैं 
 तो चलो हम उनकी जीवन संध्या में प्रेम और विश्वास की रोशनी जगाएं 
उनकी व्यर्थ चिंता और डर के अंधेरे को दूर भगाएँ 
जिस सम्मान और स्वाभिमान से उनका जीवन गुजरा है 
वह यूँ ही कायम बना रहेगा ऐसा यक़ीन दिलाएं 
कि प्रेम और कर्त्तव्य बोध से उनकी हर साँस में शान्ति और सुकून पहुँचाए 

अलका डांगी 









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