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Tuesday, June 27, 2023

रिश्तों का ताना-बाना

रिश्तों का तानाबाना 
बहुत हो गया समझना - समझाना 
कब चिंतित होकर समाप्त हुआ उलझाना सुलझाना
इस राह पर चलकर इतना तो तय है जाना 
नियति को है अगर मंजूर 
तो बिगड़ा हुआ भी बन जाएगा 
रूठा हुआ  भी एक दिन लौट आएगा 
उसकी मर्जी के आगे कुछ भी नहीं 
चाहे लाख कोशिश कर ले फिर ज़माना 

बहुत हुआ रूठना मनाना 
सलाह मशवरो का अंबार लगाना 
दुखी होना और पछताना 
आखिर कब तक रिश्तों के भँवर में फंसकर 
अँधेरों से टकराना और फिर गोते लगाना
छोड दो सारी चिंता और अनावश्यक घबराना 
किसको जवाबदेही किसको समझाना 
किसको सिद्ध कर है बताना 
निष्कपट दिल और सरल मन 
इश्वर का है बस वहीँ ठिकाना 
जिसने  जीवन के इस सत्य को जाना 
उसने सीख लिया सब कुछ अपनाना 
कर्मों का खेल है सारा 
न बदले और द्वेष की हो मन में भावना 
लेन-देन का सिलसिला और आगे नहीं बढ़ाना 
सब कुछ यहीं  चुका कर दुनिया से हल्के हो कर जाना
बन कर ऐसी तृप्त आत्मा जिसमें हो सिर्फ शान्ति और सद्भावना 
तब जाकर सुलझेगा सदा के लिए रिश्तों का ये ताना-बाना 

अलका डांगी 




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