यह आजादी कहाँ इतनी आसान थी
देश भक्तों और शूरवीरों का बहुत मुश्किल भरा इम्तिहान थी यह आजादी कहाँ इतनी आसान थी
बरसों तक सरजमीं इस गूँज के लिए परेशान थी
यह आजादी कहाँ इतनी आसान थी
मातृ-भक्तों ने भारत माँ को सर्वोपरि चुना
धन्य वो माताएँ जिन्होंने उन सबको जना
जिनके रक्त के कण-कण में स्वतंत्रता और आजाद देश का बसा था सपना
जीने-मरने की सुध कहाँ - ये लड़ाई तो देश के स्वाभिमान और सम्मान की थी
ये आजादी कहाँ इतनी आसान थी
अंग्रेजों और मुगलों की हुकूमत को नेस्तनाबूद करना
शोषण और अत्याचार की जंजीरों से देश वासियों को मुक्त करना
अपनी संस्कृति और धरोहर की रक्षा करना
उन वीरों के व्यक्तित्व की यही पहचान थी
ये आजादी कहाँ इतनी आसान थी
भारत माता की स्वतंत्रता देश भक्तों और वीरों का बलिदान थी
यह व्यर्थ न जाए - बात है अब हम सबके भविष्य और कल्याण की
भारत की सभ्यता और अनमोल विरासत की पूँजी अब हाथ में है हर नौजवान की
आजादी , आजादी और आजादी. !! यह लड़ाई है स्वतंत्रता स्वाधीनता और अधिकार की
धरती पर हर इन्सान की
सबके आत्मसम्मान की
अलका डांगी
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