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Wednesday, November 5, 2025

गाँवों का शहरीकरण. !!


गाँवों का शहरीकरण  !!

प्रकृति और संस्कृति का जहाँ होता है मिलन 
सादगी और सुकून से भरा-पूरा जीवन 
पर्वत पहाड़ियों की ऊँचाइयों का आकर्षण 
खेत खलिहानों से महकता घर आँगन 
सब कुछ धीरे-धीरे दमन हो रहा है 
कि अब गाँवों का भी शहरीकरण हो रहा है 

गाय भैंस के तबेले 
पशु पक्षियों के मेले 
मौसम अनुसार सब्जी फलों के ठेले
तीज त्योहार के मेल-मिलाप और हँसी खेले
अपनेपन का समीकरण कहीं खो रहा है 
कि अब गाँवों का भी शहरीकरण हो रहा है 

कड़ी मेहनत और शुद्ध सात्विक खान-पान 
प्राकृतिक चिकित्सा और आयुर्वेदिक ज्ञान
स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की पहचान
आधुनिकता के नाम पर 
शहरों का अनुकरण हो रहा है 
कि अब गाँवों का भी शहरीकरण हो रहा है 

कृषि प्रधान मेरा गाँव मेरा देश 
जिसकी पहचान इसकी संस्कृति और परिभेष
महत्व जहाँ धर्म और कर्म का विशेष
पाश्चात्य संस्कृति और सभ्यता ने कर लिया वहाँ प्रवेश
शोर-शराबा और दिखावे की जिंदगी जीते जीते 
चेहरे पर मुस्कान है और अंतःकरण कहीं रो रहा है
कि शहरों का तो वैश्वीकरण हो रहा है 
और गांवों का शहरीकरण हो रहा है 

अलका डांगी 
 

 



 


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