माया , कपट, राजनीति या सच्चा प्रेम !!
अदृश्य होकर अपना खेल खेलती है
प्यार और मासूमियत का मुखौटा पहनती है
अपने स्वार्थ की पराकाष्ठा होती है
दाँव पेंच में ही रचती बसती है
बड़ी बेगैरत होती है
क्या तुमने कभी कपट का रूप देखा है
विश्वासघात का असली झरोखा है
दोगलापन और मक्कारी बेहिसाब है
अपने फरेब को छिपाने के लिए पहनता सदा शालीनता और सच्चाई का नकाब है
जीवन का सबसे बड़ा दाग है
क्या तुम कभी राजनीति का शिकार हुए हो
माया कपट से भरी, शतरंज की चाल से लेस
ईर्ष्या-जलन , असुरक्षित भावना, जाने कितने मन में लेकर द्वेष
पद प्रतिष्ठा की चाह में कराती हैं क्लेश
जिद्द, जुनून और खोखली बातों की मिसाल है
ज़मीर पर उठता एक सवाल है
क्या तुमने कभी सच्चे प्रेम को महसूस किया है
निःस्वार्थ, निष्कपट प्यार का सागर
करुणा और भावनाओं से छलकता गागर
सरल, सहज, स्वाभाविक और समझदार
यही है सुखमय जीवन का असली आधार
माया, कपट और राजनीति के लिए बंद है उसके द्वार
अंतरात्मा कभी नहीं करती इन्हें स्वीकार
अपनाना है तो प्रेम को अपनाओ
यही देगा आत्मिक सुख और होगा जीवन का उद्धार
अलका डांगी
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