होली के कुछ अलग रंग !!
सबके जीवन में प्रेम और वात्सल्य का रंग भरते हैं
बढ़ रहा है जो आपसी संबंधों में अन्तर
उसमें विश्वास के रंग भरकर दूरियाँ कम करते हैं
रिश्तों की कड़वाहट को नम्रता की मिठास से खत्म करते हैं
निराशा और हताशा से भरे है जिनके चित्त
आस्था की किरणों से उत्साह के रंगों की ज्योत करते हैं
नफरत की दीवार को चाहत के रंगों से ओतप्रोत करते हैं
ये पर्व है खुशियों का, मिलन का, बुराई पर अच्छाई की जीत का
चलो फिर आत्मा को जीत कर हर आत्मा को आत्म विभोर करते हैं
इस पर्व को आनंद और खुशियों के रंगों से सराबोर करते हैं
सबके जीवन में प्रेम और वात्सल्य का रंग भरते हैं
इस बार होली में द्वेष और ईर्ष्या का दहन करते हैं
अलका डांगी
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