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Thursday, April 20, 2023

आधुनिकीकरण के गुलाम या स्वतन्त्र

आज जब पूरी दुनिया डिजिटल हो रही है आदमी अपने दैनिक कार्यक्रम से लेकर सभी महत्वपूर्ण कार्य और जानकारी कुछ ही समय में हासिल कर सकता है,  एक जगह से दूसरी जगह तुरंत पहुंचा सकता है पर वह पूरी तरह सही है इसकी कोई गारंटी नहीं होती और हम 
 इस बात से  भी बिल्कुल अनजान हैं कि इसके पीछे हम अपनी गोपनीयता भी कहीं न कहीं खोते चले जा रहे हैं | एक तरफ  इस बात का एहसास है कि मिनटों में हमारा काम घर पर या कहीं पर भी बैठे बैठे पूर्ण कर सकते हैं वहीं यह किसी बड़ी विडंबना से कम नहीं है कि हम इस टेक्नोलॉजी के गुलाम होते जा रहे हैं | अब इंसान का एक दूसरे पर विश्वास कम होता जा रहा है वहीं टेक्नोलॉजी में ज्यादा विश्वास करने लगा है | जहां अपना खालीपन सोशल मीडिया से दूर करने की कोशिश कर रहे हैं वहीं अंदर से खाली होते जा रहे हैं |
आज हम समय  और  आधुनिकीकरण का वास्ता देकर नई टेक्नोलॉजी के साथ जीना सीख रहे हैं और बहुत हद्द तक यह जरूरी भी है पर इस बात से भी हमें वाकिफ होना चाहिए कि हम किसी पर इतना ज्यादा आश्रित न हो जाए कि उसके बिना हम पंगु हो जाए और हमारा काम ही अटक जाए या फिर हम किसी के गुलाम बन जाए  |
सदियों से चली आ रही हमारी परम्पराएँ जैसे किताबों से पढ़ना, उनमे लिखना हमारे दिमाग को भी विकसित करता है और हमारी धरोहर सुरक्षित भी रहती है | इस डिजिटल इरा में जब हम सब कुछ पेनड्राइव  , पीडीएफ और  हार्ड ड्राइव में सुरक्षित रखते हैं और यह सब चीजें बहुत उपयोगी भी है और जो बहुत कम जगह लेती हैं और बहुत उपयोगी भी साबित हुईं हैं परंतु इसमें सब कुछ डिलीट होने और खो जाने का भय बना रहता है |
ऐसे वक्त में हमारे लिखने की पद्धति बहुत ही सुरक्षित होती है आज भी जो आनंद हमें किताब पढ़ने में मिलता है वह किंडर में नहीं ,  जो मजा फोटो एल्बम देखने में आता है वह डिजिटल में नहीं | जब हम बैंक जाते हैं ,  किराने की दुकान जाते हैं या सब्जी फल वगैरह लेने जाते हैं उनसे एक  अलग ही आत्मीय व्यवहार बन जाता है  वह ऑनलाइन में कहीं घर पर ही कैद होकर रह जाता है | हमारा व्यवहार  , हमारी जान - पहचान सब अपनो तक ही सीमित हो गई है | हमारी संस्कृति में हम जरूरत पड़ने पर एक दूसरे की मदद के लिए सदा तत्पर रहते हैं  , खैरियत पूछते  रहते हैं  और अब जब घर से बाहर निकलना ही बंद हो गया तो ना हम हमारे आस पड़ोस में रहने वालों को पहचानते हैं न कोई हमें पहचानता है | इस swiggy  , जोमैटो किचन में हमारे लोकल रेस्टोरेंट और होटल का स्वाद और अपनापन कहीं भी महसूस नहीं होता |
ये सही है कि समय के साथ बदलाव बहुत जरूरी है और आधुनिकीकरण बहुत जगह वक़्त की माँग होती है और  कई काम आसान कर देता है | परन्तु हमें हमारी आधुनिकता के साथ-साथ अपने क़ीमती धरोहर को भी बचाकर रखना चाहिए और  अपनी धरोहर की उतनी ही इज़्ज़त भी होनी चाहिए जिससे हम किसी के गुलाम नहीं बन कर रह जाए और सही मायने में स्वतंत्र  और खुशहाल जिंदगी गुजार सके |

अलका डांगी 


Wednesday, March 29, 2023

राज +नीति अर्थात राजनीति




जब छोटे थे तब राजनीति का मतलब ही नहीं पता था टीवी पर अखबार में यह शब्द कई बार सुना बड़ों को भी इसके बारे में अपने मतभेद और चर्चा करते सुना था और हम समझते थे कि अपनी सरकार बनाने के लिए जो नेता लोग करते हैं वही राजनीति होती है | किसे पता था कि राजनीति सिर्फ नेता लोग ही नहीं करते अपितु हर घर  - परिवार में , कार्यालय में और जीवन के किसी भी क्षेत्र में आपको राजनीति दिख ही जाएगी | हम अपने माता-पिता के बनाए गए सुरक्षित घेरे से जब बाहर निकलते हैं अपने फैसले जब खुद से लेते हैं और अपना मकाम हासिल करने के लिए बाहरी दुनिया में कदम रखते हैं तब एहसास होता है कि  पग - पग पर राजनीति हो सकती है और जाने - अनजाने आप स्वयं भी उसे अपनाते हो या उसका मोहरा बन जाते हो| राजनीति का अर्थ इसी शब्द में निहित है राज +नीति  अर्थात राज करने के लिए जो नीति अपनाई जाती है उसे ही राजनीति कहते हैं | राजनीति समझने वाले ही समझ सकते हैं नहीं तो पूरी जिंदगी इसे समझने में निकल जाती है फिर भी पता नहीं पड़ता या एहसास तक नहीं होता है कि राजनीति क्या होती है और बहुत से ऐसे मासूम लोग भी होते है जो पूरे जीवन में इसे समझ और देख नहीं पाते  |
राजनीति के लिए आदमी अपना जमीर भी भूल जाता है अपने अहम की संतुष्टि के लिए वह किसी भी हद तक जा सकता है , जब राजनीति का भूत सवार हो तो सही  - गलत , अपना - पराया कुछ नहीं दिखता बस किसी तरह अपना मतलब और स्वार्थ सिद्ध करने की धुन उसके सर पर सवार हो जाती है  | राजनीति करने वाले जब किसी को अपना मोहरा बनाकर अपनी चाल चलते हैं और उसका इस्तेमाल करते हैं तब आदमी बुरी तरह प्रभावित होता है और कभी-कभी लाचार हो जाता है इसलिए ऐसे लोगों से बहुत संभलकर और सजग रहना आवश्यक है |
राजनीति सदियों से चली आ रही है और चलती रहेगी |
आप राजनीति करने वालों को रोक तो नहीं सकते परंतु जीवन में उनसे दूर रहने और अपने आपको उनका मोहरा बनकर इस्तेमाल होने से बचाने का प्रयत्न जरूर कर सकते हैं |

अलका डांगी 

Monday, December 5, 2022

एक सफर ये भी. !!

एक सफर ये भी...

housewife से homemaker हो गई
हुनर तो housewife में भी कमाल थे 
पर अपने हक और अधिकार की रक्षा की खातिर 
caretaker से moneymaker हो  गई 
स्वेच्छा से पिया घर का ख्वाब सजाने गई थी 
त्याग और समर्पण की कदर न हुई तो 
अपनी काबिलियत का डंका बजाकर daydreamer से entrepreneur हो गई 
परिवार की खुशी में ही खुश और संतुष्ट थी कभी 
अब हर field में achiever और थोड़ी selflover हो गई 
बेचारी तो वो कभी भी नहीं थी 
पर वक़्त और हालात के साथ-साथ 
थोड़ी better और  go-getter हो गई 

अलका डांगी 


Sunday, October 9, 2022

महामारी की लहर !

महामारी की लहर  !
महामारी की लहर असर कर गई है 
दौड़ती भागती जिंदगी एकदम से थम गई है
पर कहीं जिंदगी की नई शुरुआत भी हुई है

जो कल तक काम करने से कतराते थे
ये अपना काम नहीं, कहकर चले जाते थे
वे आज मदद के लिए हर पल तैयार है
हर काम के प्रति मिट गई अब भेदभाव की दिवार है 

कोई रसोई में तो कोई सफाई में हाथ बंटा रहे है
घर और ऑफिस के काम में संतुलन बना रहे हैं 
और गर्व से वीडियो शेयर करके
अपने आप पर इठला रहे हैं

जो ऑफिस के काम में पूरी तरह डूब चुके थे
अपने बच्चों की कक्षा और उम्र भी भूल चुके थे
वे आज अपना क़ीमती वक़्त बच्चों के इर्द गिर्द बीता रहे हैं
कभी चेस, कभी लुडो तो कभी ताश की बाजी लगा रहे हैं

कोई अपना शौक पूरा कर रहा है
किसी के अंदर छुपा हुआ हुनर बाहर निकल रहा है
बरसों बाद फिर परिवार की महफिल सजी है
अपनों के बीच जिंदगी आज फिर से खुलकर हँसी है


ये भी हकीकत है कि इस वक़्त के चित्र है भिन्न - विभिन्न 
कोई समय के रंगों में रंग गया है 
तो किसी का जीवन  हताश और खिन्न रह गया है 
पर ये भी वक़्त का तकाजा है 
जो बदल रहा हर पल हर क्षण 
संयम और धैर्य की परीक्षा है 
जिसने समझ लिया वही हो जाएगा उत्तीर्ण 



अलका डांगी

Wednesday, September 14, 2022

हिन्दी

किसी को सरल , किसी को कठिन , किसी को लगती अजीब हो 
 पर हिन्दी तुम आज भी हमारे दिल के बहुत करीब हो |

कहीं किसी लेखक और कवि की सोच और अभिव्यक्ति हो 
तो किसी की श्रद्धा और भक्ति हो 
तुम आर्य संस्कृति की जड़ों से जुड़ी हो 
भाषाओं की भीड़ में भी अटल खड़ी हो 
सब को  जोड़कर रखने वाली मजबूत कड़ी हो 
हमारी शान , हमारी तहजीब हो 
हिन्दी  तुम आज भी  हमारे दिल के बहुत करीब हो |

तुम कहाँ अपने आप तक सीमित हो 
तुम हर भाषा में कहीं न कहीं निहित हो  
कहीं नफरत की शिकार, कहीं बगावत  का वार झेलकर भी  मुस्कुराते हुए अविचलित हो 
चाहे नई जीवन-शैली , नई पीढ़ी में भावना रहित हो 
बेहिचक सब में घुल-मिल जाती, कितनी शरीफ हो 
हिंदी तुम आज भी  हमारे दिल के बहुत करीब हो |

राजभाषा की पदवी से गौरवान्वित हो 
दुनिया के कई कोनों में चर्चित हो 
स्वर व्यंजन से सदा से ही सुशोभित हो 
हमारे मन - मंदिर में श्रद्धा से पूजित हो  
पहले अक्षर से आखिर तक सिर्फ तुम ही तुम अंकित हो 
हिन्दी तुम आज भी दिल के बहुत करीब हो |

अलका डांगी 



















Saturday, September 10, 2022

देव गुरु धर्म

भवों भव के फेरों का जो तोड़ देते क्रम 
अपनी वाणी अपने प्रभाव से मिटा देते 
संसार के सारे भ्रम 
जीवन सफल हो जाए उनका 
जिन्हें मिल जाते सच्चे देव गुरु और धर्म 


देव अरिहंत गुरु निग्रंथ और अहिंसा परमो धर्म 

देव - गुरु - धर्म  ये तीन सिर्फ शब्द नहीं अपितु जीवन के वे अनमोल और अमूल्य रत्न है जिन्हें  इनका समागम प्राप्त हो जाए उनका जीवन सफल और आत्मा का कल्याण भी निश्चित ही हो  जाता है  |

ऐसे तो हमारे प्रथम गुरु हमारे माता-पिता तथा हमारे शिक्षक होते है जो हमें सामाजिक , व्यवहारिक और शैक्षणिक ज्ञान से अवगत कराते हैं | उनका भी हमारे जीवन में बहुत बड़ा  उपकार और योगदान होता है परन्तु सच्चे गुरु वही होते हैं जो हमें सच्चे देव और सच्चे धर्म की  पहचान कराते हैं | वे  ही  हमारे जीवन को अधोगति  में जाने से  बचाते हैं और हमारे जीवन का उद्धार करते हैं | उन्हीं  से  हमें  आत्मज्ञान  होता है और सम्यक ज्ञान और सम्यक दृष्टि  प्राप्त होती है  जिससे हम हमारी मंजिल की और अग्रसर हो कर हमारे जीवन को सार्थक करने में समर्थ होते हैं | 

धर्म का मूल विनय और विवेक है जो हर पल हर जीव और हर प्राणी से जुड़ा रहता है परंतु सांसारिक और व्यवहारिक कार्योँ में उलझकर हम इसके सही स्वरूप को देख और समझ नहीं पाते |सच्ची समझ के अभाव में हम बाह्य आडंबर और क्रिया कर्म से आकर्षित होकर उसी को धर्म का रुप दे देते हैं | सच्चे गुरु द्वारा सच्चे धर्म की प्राप्ति होती है और सच्चा  धर्म  अंगीकार होने पर ही हम अहिंसा के पथ पर चलते हुए  अपने जीवन से राग द्वेष और कषाय का निर्मूलन कर कर्मों के बंधन से मुक्त हो सकते हैं  |सच्चा  धर्म हमें शक्ति और बल प्रदान करता है  ,  हमें कठिन से  कठिन परिस्थितियों में भी विचलित होने से बचाता है और समभाव और सद्भाव में स्थिर रखता है और हमारी आत्मा का कल्याण करता है |

जहाँ सच्चा  धर्म है  वहीं सच्चे देव का भी वास है  | इस संसार में कई देवी-देवता हैं जो पूजे जाते हैं तथा उनकी साधना और भक्ति की  जाती है | हम नादान इसी चक्कर में संसार में भटकते रहते हैं परंतु सच्चे देवता का वास हमारी आत्मा में निहित है यह वही समझ सकता है जिसने आत्मा के शुद्ध स्वरूप को पहचान लिया |  सच्चे धर्म का  देवता भी साथ देते है और कठिन परिस्थितियों में अपने आशिर्वाद की छत्रछाया में सुरक्षित रखते हैं | सच्चे गुरु से सच्चा धर्म प्राप्त होता है और सच्चे धर्म से हमें सच्चे देव के दर्शन प्राप्त हो जाते हैं | सच्चे देव स्वयं भी राग-द्वेष के बंधन से मुक्त होते हैं और हमें भी अपनी आत्मा से परमात्मा के दर्शन कराने और  सिद्ध बुद्द और मुक्त होने में सहायक बनते हैं |

गुरू के आशीर्वाद से  सम्यक ज्ञान-  सम्यक दर्शन  और सच्चे धर्म को प्राप्त करते हैं- धर्म अंगीकार कर और कण कण में बसा कर देव की शरण प्राप्त करते हैं और इन सब के आशीर्वाद और छत्रछाया  में अपनी आत्मा को सिद्ध बुद्द और भवों भव  के फेरों से मुक्त कर सकते हैं |

अलका डांगी 

Friday, September 9, 2022

व्यक्ति और व्यक्तित्व

हर व्यक्ति का अपना एक अलग व्यक्तित्व होता है | उसके बात करने और बोलने की भी एक कला होती है , अपनी अलग शैली या अपना एक अंदाज होता है जो उसके व्यवहार और आचरण में झलकता है |
किसी व्यक्ति का बोलने का तौर तरीका तथा उसका आचरण उसका अपना जिंदगी की तरफ का दृष्टिकोण , उसका नजरिया और उसके व्यक्तित्व को दर्शाता है  |  वहीं वक़्त के साथ-साथ जिंदगी का तजुर्बा , इर्दगिर्द का वातावरण तथा परिस्थितियाँ उसके अंदाज , नजरिए और उसके व्यक्तित्व को बहुत हद्द तक  प्रभावित भी करते है | और हर किसी का व्यक्तित्व उसके परिवार और एक पूरे समाज को प्रभावित करता है यह कभी न खत्म होने वाला एक चक्र है जिसका संबंध आपस में एक दूसरे से सदा जुड़ा हुआ है  |

धर्म-प्रेमी, सरल और निर्मल हृदय वाले व्यक्ती विनय विवेक से अपना कार्य करते है उनकी कथनी-करनी भी समान होती है |कटु -वचन और व्यंग्य उनके शब्दकोश में ही नहीं होते | सभी के साथ प्रेम से और विनम्रता से पेश आते हैं, किसी के काम में दखलअंदाजी नहीं करते, तर्क - वितर्क से दूर रहना पसंद करते हैं तथा अक्सर मौन रहकर खुशनुमा और अनुकूल वातावरण बनाये रखतें है | ऐसे व्यक्ति अपने आप से संतुष्ट होते हैं ऐसे व्यक्तित्व बहुत विरले ही होते हैं तथा समाज के लिए वरदान रूप होते हैं  |

अभिमानी और अहंकारी व्यक्ति हर बात में अपनी बात को ऊँचा रखते हैं और सभी उनकी बात से सहमत हो ऐसा प्रयत्न करते है  | वे अपनी तारीफ करना और सुनना पसंद करते हैं यदि उनके सामने किसी और की प्रशंसा हो तो तुरन्त बीच में बात काटकर उसकी बुराई या कोई गलती दिखाकर उसे नीचा उतारने की कोशिश करते हैं | किसीकी भी हँसी उड़ाना, उसे नीचा दिखाना इन सबमें उन्हें आत्मिक संतुष्टि प्राप्त होती है, ऐसे व्यक्तित्व वाले लोग सदा तर्क-वितर्क के लिए तैयार रहते हैं और अपनी बात सही साबित करने में अपनी कामयाबी और खुशी महसूस करते हैं | ये समाज और परिवार की प्रगति में बहुत बड़े बाधक बनते हैं  |

एक बड़ा तबका समाज का उन व्यक्तियों से भरा है जो 
ऊपर से मीठा और अच्छा बोलते हैं पर मन में माया कपट और छल चल रहा होता है | ये बड़े वाक्चातुर्य होते हैं जिन्हें हर कोई नहीं समझ पाता | ये सदा सभी बातों का दोष दूसरों पर डालने के लिए तत्पर रहते हैं और अपनी छवि सही घोषित करने में जुटे रहते हैं | समय और व्यक्ति के अनुसार ये शब्दों का चुनाव कर प्रयोग करते रहते हैं | ऐसे व्यक्तित्व वाले लोगों का पूरा जीवन इसी दाँव पेंच और प्रपंचों में निकल जाता है | ये राजनीति करने में भी माहिर होते हैं और समाज में कुरीतियां और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हैं  |

एक व्यक्तित्त्व होता है पंचायत करने  और दूसरों  को खुश रखने वालों का जिन्हें अपने से ज्यादा दूसरों की जिंदगी में क्या और क्यूँ  चल रहा है उसमें दिलचस्पी रहती है  पूरे गाँव शहर और समाज का जैसे ठेका उन्हीं के पास हो  , सबकी जानकारी हासिल करना तथा इधर उधर करना उन्हें आत्म संतुष्टि देता है | दूसरों की खुशी के लिए ये   कुछ भी करने के लिए तैयार  रहते हैं  और लोगों के चहेते भी होते है  परंतु कभी-कभी दूसरों की मुश्किलों की वज़ह भी बन जाते हैं | ये समाज और परिवार की सिर्फ जरूरत बनकर रह जाते हैं  |

बहुत से शांति प्रिय व्यक्तित्व वाले व्यक्ती भी होते हैं जिन्हें किसी से कुछ लेना-देना नहीं होता बस अपने काम से काम,  चुपचाप अपनी दुनिया में व्यस्त रहते हैं  ये शांत गंभीर और अपनेआप में खुश रहते हैं और तटस्थ रहना पसंद करते हैं | 
शांत व्यक्ती का एक और प्रकार होता है  जैसे शांत पानी बहुत गहरा  होता है वैसे ही कभी-कभी शांत दिखने वाले व्यक्ति के मन की गहराई में  बहुत खलबली और हलचल मच रही होती है |किसी वज़ह से  दिल की बात बाहर नहीं कर पाते और अंदर ही अंदर कुढ़ते रहते हैं  ऐसे व्यक्ति बहुत भावुक या ईर्ष्या से ग्रस्त होते हैं इसलिए मानसिक रोग के शिकार बन जाते हैं या कभी हिंसक भी बन सकते हैं  | 

समाज  और परिवार में ऐसे तथा अन्य कई प्रकार के व्यक्ति रहते हैं और  प्रतिदिन हमारा सामना भी उनसे होता रहता है |  उनकी आलोचना करना या तुलना करना या अपने तराजू में माप कर उन्हें सही-ग़लत साबित करना हमारा मकसद नहीं होना चाहिए | बल्कि  हम पर  और हमारे द्वारा किसी पर गलत और नकारात्मक आचरण का प्रभाव न हो इसके लिए सबसे पहले हमारा कर्तव्य बनता है कि हम अपने व्यक्तित्व को  भली भाँति पहचाने और उसमें निखार और सुधार लाने की कोशिश करे और अपने मन और जीवन को निश्छल,सरल और सादगी पूर्ण बनाए ताकि हमारा व्यक्तित्व किसी अन्य व्यक्ती और उसके जीवन में कठिनाइयों का सबब ना बने | हमारा व्यक्तित्व  और आचरण एक सुखी परिवार और सभ्य समाज की नींव मजबूत करने में सदा सहायक बने यही हमारा प्रयत्न होना चाहिए  |

अलका डांगी