इसने क्या कहा ?
उसने क्या किया ?
क्यों उठाते हो ये सवाल?
क्यूँ करते हो इसकी - उसकी बातों पर बवाल?
इसका - उसका, जीने का अलग तरीका
सबकी अपनी सोच, सब का अलग सलीका
अच्छाई - बुराई करके तुमने क्या सीखा?
किसीके जीवन में ना करो दखलअंदाजी
तभी रह पाएगा वह दिल से राजी
इसकी चुगली, उसकी बुराई
क्यूँ करते हो अपनी - पराई
सबके अपने कर्म, सबकी अपनी कहानी
सही क्या, गलत क्या, न इसने जानी न उसने मानी
क्यूँ चाहते हो फिर करवाना तुम अपनी मनमानी
उसकी खुशी मैं क्यूँ होती तुम्हें जलन
उसकी हँसी मैं क्यूँ होती तुम्हें चुभन
काश झाँक लेते कभी तुम अपना भी मन
आसान हो जाता सभी का जीवन
सुख-दुःख की वज़ह कोई नहीं
कर लेते अगर आत्मचिंतन
व्यर्थ नहीं जाती ये जिंदगानी
ना होती बैचैनी ना ही कोई परेशानी
अपने हृदय को कोमल और सरल रख
सबको अपने तरीके से जीने का है हक
न अगर कुछ समझ आए, तो कर लेना मौन धारण
पर बनना मत किसी के क्लेश का कारण
करना है तो नेकी कर, दरिया में डाल
पर फिर ना उठाना किसी पर कोई सवाल
न करना फिर कभी इसकी - उसकी बातों पर बवाल
अलका डांगी
1 comment:
Wow. Superb 👍👍
Post a Comment