Nuclear family! पता नहीं ये शब्द कहाँ से आया और किसने इसकी खोज की पर जिस तरह इसे हीन दृष्टि से देखा जाता है, वो एकल परिवारवालों के दिलों पर चोट करती है संयुक्त परिवार हो या एकल परिवार, परिवार आखि़र परिवार ही होता है |आपसी संबंध, जिम्मेदारियाँ, उतार- चढ़ाव, लड़ाई - झगड़े, ये तो हर एक परिवार का अभिन्न अंग है, तो फिर एकल परिवार को अपनी नजरों से उतार कर संयुक्त परिवार को ही महत्व क्यूँ दिया जाता है?
कोई नहीं चाहता की वो अपने घर-परिवार से दूर अकेला रैन बसेरा करे | जब आदमी उच्च शिक्षण, नौकरी या व्यापार के लिये परिवार से दूर बसता है तो इन सबके पिछे कोई वजह होती है | दूर रहकर भी वह अपनी जड़ों से जुड़ा रहता है और समय निकालकर अपने परिवार वालों के साथ समय व्यतीत करने के सपने दिल में संजोए रखता है |
कुछ एक सम्बंध होते है ऐसे जहां माता पिता या किसी अन्य परिवार वालों से मतभेद या अनबन हो जाती है और सबकी सुख - शांति के लिए व्यक्ति चला जाता है अकेला अपना निर्वाह करने पर उसे भी अपने दिल पर पत्थर रख कर ऐसा करना पड़ता है
संयुक्त परिवार में जिम्मेदारियां बंट जाती है, सुख - दुख में एक दूसरे का सहारा मिल जाता है, बच्चे बड़े हो जाते सुख दुख में मिलकर रहना सीखते हैं , सगाई और शादी जैसे महत्वपूर्ण काम संपूर्ण रीति रिवाज और बिना किसी रुकावट के संपन्न हो जाते हैं , एक ही आदमी को सारा बोझ नहीं उठाना पड़ता है |
वहीं एकल परिवार में घर - परिवार की जिम्मेदारी अकेले ही निभानी पड़ती है चाहे वो बच्चों को पढ़ा लिखा कर बड़ा करना हो या कोई सुख दुख का समय हो.. और पूरी जिंदगी ये सिद्ध करने में गुजर जाती है की हम भी परिवार से उतना ही प्यार करते हैं और उतना ही साथ रहना पसंद करते हैं बस फर्क़ इतना है कि हम दूर हैं इसलिए आप यहाँ आकर हमारे साथ रहना पसंद कम करते हैं और हम चाहकर भी साथ नहीं रह सकते
ये बात और है कि दोनों परिवार में रहने वालों के अपने अपने अलग दृष्टिकोण है परंतु हमेशा तव्वजो संयुक्त परिवार वालों को ही मिलती है
काश ये बात भारत की संस्कृति में रहने वालों को समझ आये और परिवार को एकल और संयुक्त की नजरों से तोलना बंद कर दें
अलका डांगी
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