उसकी मनःस्थिति समझने की कोशिश तो कीजिए
सलाह - मशवरा नहीं, उसे प्यार और हौसला दीजिए
वह टूट कर बिखर जाए उससे पहले उसे सम्भाल लीजिए
न वह तन से बीमार है न मन से
गुट रहा है वह हर पल अवसाद के अकेलेपन से
सब साथ है फिर भी नहीं जानता क्यूँ
घिरा हुआ है चिंता, घबराहट और खालीपन से
समझते हुए भी बेबस है और मजबूर है
इस अनजाने मर्ज के भँवर की जकड़न से
इस वक़्त अपना साथ दीजिए और उसका विश्वास जीतीए
इस भँवर से बाहर निकालने में उसे हिम्मत दीजिए
ये वक़्त भी गुजर जाएगा बस उसका हाथ थाम लीजिए
हँसते मुस्कुराते हुए उसकी सुनी बगिया गुलजार कीजिए
टूटे - बिखरे हुए मन को जोड़कर फिर से उसका जीवन सँवार दीजिए
अलका डांगी
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