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Friday, March 5, 2021

बुढ़ापा तो यूँ ही बदनाम हो गया !!

ये बुढ़ापा तो यूँ ही बदनाम हो गया.!! 

जवानी में इसकी बात न मानी 
जिम्मेदारी और भागदौड़ में अपने 
शरीर की कदर न जानी
और समय हाथ से निकल गया 
ये बुढ़ापा तो यूँ ही बदनाम हो गया.!! 

इसने तो अपने लिए जीने का समय दिया 
ढलती शाम की रंगीनियत का परिचय दिया 
अपने अधूरे ख्वाब और शौक फिर से अपनाने का ज़ज्बा दिया 
पूरा जीवन तजुर्बे से भर गया 
ये बुढ़ापा तो यूँ ही बदनाम हो गया  !! 

योग, प्राणायाम, और ध्यान  लगाकर 
श्वाछोश्वाश की तरफ ध्यान केंद्रित किया 
धर्म, अध्यात्म और समाज सेवा से जुड़कर 
जीवन का मर्म समझ लिया 
समय का खालीपन भरता गया 
ये बुढ़ापा तो यूँ ही बदनाम हो गया !! 

बच्चों और परिवार के साथ बेफ़िक्र हो 
हर सम्बंध और गहरा किया 
दोस्तों के साथ गपशप और ठहाके लगाकर 
अपने आयुष्य को लंबा किया 
नया ज़माना, नई पीढ़ी, नई सोच के साथ 
जीवन में नए अनुभव भरता गया 
ये बुढ़ापा तो यूँ ही बदनाम हो गया !! 

हर जीवन का ये अभिन्न अंग है 
आज हमारे तो कल किसीके संग है 
तन पर हमारा बस नहीं तो क्या 
गर हर मन में जीने की उमंग है 
फ़िर जिंदादिल और प्रफुल्लित
 जीवन का हर क्षण हो गया 
ये बुढ़ापा तो यूँ ही बदनाम हो गया !! 


अलका डांगी 



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