चंद लम्हे फुर्सत के. !!
एक अरसा हो गया फुर्सत के कुछ पल से रुबरु हुए
तवज्जो नहीं दी जिसे करीब होते हुए
जाने कहाँ खो गए वो पल हमसे रूठे हुए
ढूँढ रही हूँ अब उसे , अनदेखा कर दिया था जिसे राह में चलते हुए |
इस कदर अपनी दुनिया में हम मशगूल हुए
कि बरसों बीत गए अपनी सुध लिए हुए
फुर्सत के कुछ पल फिर याद आये , जब अपनों की महफ़िल में भी हम तन्हा हुए
ढूँढ रही हूँ अब उसे , अनदेखा कर दिया था जिसे राह में चलते हुए |
इस बार कोई बहाना नहीं , फुर्सत निकालनी है फुर्सत के कुछ पल जीने के लिए
हर वो द्वार खोलने है जो बंद कर दिए थे अपने लिए
बेफिक्र हो जाना है फुर्सत को जीवन में अपनाते हुए
कि फुर्सत का हाथ थाम लेना है बिना हिचकिचाते हुए
सहेज लेना है अब उसे , अनदेखा कर दिया था जिसे राह में चलते हुए |
जरूरी है फुर्सत के कुछ पल भी ,सुचारु जीवन चलाने के लिए
चंद लम्हें फुर्सत के चाहिए हँसने , खेलने और अपनी रूचि अपनाने के लिए
कि अपने लिए भी जीना है ,जिम्मेदारी सारी निभाते हुए
अब नजरअंदाज करके नहीं ,
अंदाज बदल के फुर्सत को गले लगाना है मुस्कुराते हुए |
सहेज लेना है अब उसे , अनदेखा कर दिया था जिसे राह में चलते हुए |
अलका डांगी
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