धर्म है
तो विनय और विवेक है
धर्म है
तो हर दिल नेक है
धर्म है
तो शुद्ध विचार और आचार है
धर्म है
तो जीवन का उद्धार है
धर्म मानवता है
धर्म समभाव है
धर्म दया और करुणा है
धर्म मैत्री भाव है
धर्म में सुख-शांति का एहसास है
धर्म में संतुष्टि का निवास है
धर्म में मोह-माया , छल - कपट नहीं
धर्म में सच्चाई और सरलता का निवास है
धर्म में आग्रह नही, धर्म अनेकांत है,
धर्म की पहचान किसी जाति या मजहब से नहीं
धर्म कर्तव्यनिष्ठ और शान्त है |
अलका डांगी
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