Sunday, November 24, 2019
बचपन
Wednesday, October 9, 2019
अमिताभ बच्चन - सदी के महानायक
सदी के महानायक हैं
जिनके लाखों चाहक है
आदमी वो बेमिसाल
कला की है एक मिसाल
अपनी पहचान आप बनाई
मेहनत और लगन से कर के सगाई
इज़्ज़त और शौहरत खुब कमाई
अपनी छवि ज़न ज़न के मन में बसाई
जीवन में देखे कई उतार चढ़ाव
थककर लाए नहीं कोई ठहराव
हँसकर पार किया हर पड़ाव
अपने उच्च मनोबल का छोड़ा प्रभाव
बच्चे बुजुर्ग या हो जवान
सभी करते आपका सम्मान
आदर्श हैं आप सभी के
ऐसी आपकी प्रेरणा महान
आपके जन्मदिन की देते है ढेरों शुभकामना
आपका प्रेम सदा हम पर रहे यूं ही बना
तन - मन यूँ ही स्वस्थ रहे
जीवन में खुशियाँ आए सौगुना
अलका डांगी
Wednesday, September 25, 2019
पर्यावरण
पर्यावरण की रक्षा में हम भी एक कदम उठाते हैं
चलो मिलकर आज एक पेड़ लगाते हैं
सृष्टि की संरचना को जिंदा रखना है
प्राकृतिक आपदाओं के प्रकोप से बचना है
वर्तमान और भविष्य को उज्जवल करना है
आओ समय रहते चेत जाते हैं
पर्यावरण की रक्षा में हम भी एक कदम उठाते हैं
समय के साथ जरूर चलना है
पर बढ़ते हुए प्रदुषण को नियंत्रण करना है
आधुनिक यंत्र - तंत्र आज की जरूरत है
पर इसकी सीमा - मर्यादा को भी समझना है
इसके पहले की ये हमें हानि पहुंचाते हैं
पर्यावरण की रक्षा में हम भी एक कदम उठाते हैं
पेड़ - पौधें तो पशु - पक्षियों का आशियाना है
फल - फुल और जड़ी बूटियों का खजाना है
इनकी जरूरत को सबने जाना और माना है
हम सबको मिलकर इनका अस्तित्व बचाना है
चलो भावी पीढ़ी के लिए ये सौगात छोड जाते हैं
पर्यावरण की रक्षा में हम भी एक कदम उठाते हैं
चलो मिलकर आज एक पेड़ लगाते हैं
अलका डांगी
Saturday, August 31, 2019
क्षमा
क्षमा वीरों का भूषण है
क्षमा ही बडप्पन है
क्षमा प्रेम का दीप जलाती है
क्षमा संबंधों की मिठास बढ़ाती है
दिल को यदि ठेस पहुंची हो तो
रूठने का पूरा है तुमको हक
पर समझौता दिलों का कर देना
पलने देना न उसमें कोई शक
गलती किसी से भी हो सकती है
चाहे छोटा हो या बड़ा
नजरअन्दाज कर देना सभी
जिंदगी जीने का है ये फलसफा
शिकायत हो कोई तो उसे बयान कर देना
रिश्तों की गरिमा को सम्मान दे देना
दिल पर कोई बोझ न रखना
माफी माँग लेना या माफ कर देना
क्यूँ की क्षमा वीरों का भूषण है
क्षमा ही बड़प्पन है
क्षमा प्रेम का दीप जलाती है
क्षमा संबंधों की मिठास बढ़ाती है
अलका डांगी
Monday, August 26, 2019
पर्युषण
संतों का कर लो समागम
कि आया है पर्व पर्युषण
धर्म की कोरी बातें हुईं बहुत
अब कर लो तन - मन - धन समर्पण
कि आया है पर्व पर्युषण
राग - द्वेष से ऊपर उठना है
तप - ध्यान भी दिल से करना है
वीर - वाणी कर लो अर्जन
कि आया है पर्व पर्युषण
संसार में ही न उलझे रहना
आगम का भी सार है समझना
अंतरात्मा का कर लो दर्शन
कि आया है पर्व पर्युषण
संयम के पथ पर चले हर ज़न
छोड़ कर राग - द्वेष और कर्मों का बंधन
सरल हो जाए सबका अंतर्मन
कि आया है पर्व पर्युषण
भवोभव से मुक्ति मिल जाए
प्रभु - वाणी आत्मसात कर जाए
छु ले प्रभुजी के चरण
कि आया है पर्व पर्युषण
अलका डांगी
Monday, August 12, 2019
तारीफ़
एक वक़्त था जब
तारीफ के लिए तरसते थे
हर लफ्ज़ तारीफ का सुनकर
हम और निखरते थे
अब तारीफ से डर लगता है
जाने क्यूँ तारीफ का हर शब्द अखरता है
तारीफ का एक अंदाज होता है
सच्चे दिल से करे तो
अपनेपन और खुशी का एहसास होता है
हर उम्र में रहती है इसकी चाहत
बढ़ाती है सबकी निगाह में इज़्ज़त
तारीफ तो हौसला अफजाई है
किसी के मेहनत की कमाई है
काबिल लगे तो जरूर व्यक्त कीजिए
पर झूठी तारीफ कर खुशामदी न कीजिए
तारीफ कार्य की शान बढ़ाती है
हर व्यक्ती को सम्मान दिलाती है
बेवजह इसकी महत्ता कम न हो जाए
बेशक! जहाँ , जितनी , जिसको जरूरत है उतनी जरूर पा जाए
आखिर तारीफ की भी तो अपनी मर्यादा होती है
किसी व्यक्ति का प्रोत्साहन और कार्य की प्रशंसा इसमें निहित होती है
इसका गौरव बरकरार रहेगा तब तक
जब तक ये स्वार्थ से नहीं, प्रेम और दरियादिली से जुड़ किसीके हित में होती है
अलका डांगी
Tuesday, August 6, 2019
मेरा देश - मेरा अभिमान
मेरे देश की है अलग पहचान
कोई सानी नहीं पुरी दुनिया में इसके समान
संस्कृति के खजाने से भरपुर
जैसे चमकता है हमारा कोहिनूर
भाँति - भाँति के लोग यहाँ
भिन्न - भिन्न है सबकी भाषा
अपना अपना परिवेश है
अंदाज है सबका हटके जरा सा
क्रिसमस, पोंगल, ईद या हो बैसाखी
हर इंसान उत्साह से मनाता यहाँ
होली, दिवाली और राखी
यहाँ की मिट्टी में मिला है
प्रेम, अपनत्व और भाईचारा
चाहे कोई जाति या मजहब
मुसीबत में बनते इक दूजे का सहारा
हर व्यक्ति अपनी जड़ों से जुड़ा है
देश, दुनिया में कहीं भी हो ठिकाना
नाज़ है हमें इसके अद्भुत सौंदर्य पर
इसकी छवि से मुग्ध है सारा ज़मानाा !!
अलका डांगी