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Tuesday, July 7, 2020

इस बार....

वो सोंधी खुशबु जो आती है पहली बारिश के साथ
वो पहली बारिश जिसमें भीगने की रहती है आस 
इस बार बुझी नहीं वो प्यास 
इस बार अलग है कुछ एहसास... 

वो छोटे-छोटे कदमों को रेनकोट में चलते हुए निहारना 
 रंगबिरंगे छातों का आपस में टकराना 
 बादलों का जमीन पर उतर आना 
इस बार कोई नज़ारा नहीं दिखा खास 
इस बार अलग है कुछ एहसास... 

वो घुटनों तक पानी का भर जाना 
स्कूल और ट्रेन का बंद हो जाना 
वो बारिश में भीगे मन का ऑफिस न जाने का बहाना बनाना 
दोस्तों के साथ मिलकर चाय पकौड़े की दावत ज़माना 
हँसना खेलना, साथ में गुनगुनाना 
इस बार आया नहीं वो रास 
इस बार अलग  है कुछ एहसास... 

इस बार दिलों में अनजाना भय है 
अपनों से मिलने जुलने में भी संशय है 
जाने कहाँ से आया ये प्रलय है 
इस बार  बारिश में ये मन गीला नहीं सुखा रहेगा ये तय है 
इस बार आंखें नम है और मन थोड़ा उदास 
इस बार अलग है कुछ एहसास.... 

अलका डांगी 









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