इन्सानियत ही होती है व्यक्ति की सबसे बड़ी पहचान
तुम रंग - रूप और कद - काठी निहारते हो
गोरे - काले, ऊँचे - नीचे, मोटे - पतले का भेद जता
हीन भावना का एहसास दिलाते हो
जो ईश्वर की देन है उसकी हँसी उड़ाते हो
एक अच्छे - भले, सीधे - सरल इंसान का आत्मविश्वास डगमगाते हो
आखिर क्यूँ नहीं दे सकते हम सभी को एक जैसा सम्मान
इन्सानियत ही तो होती है व्यक्ति की सबसे बड़ी पहचान
किसी के सपनों की उड़ान भरने से पहले ही उसके पर काट,
अपने अहं की संतुष्टि और अभिमान का झंडा लहराते हो
किसी की मंजिल की राह में रूकावट डाल अपनी कामयाबी का जश्न मनाते हो
राजनीति के दाँव पेंच खेल अपनी हुकूमत चलाने की खातिर
किसी को नीचा दिखा उसका अस्तित्व मिटाते हो
धर्म, रूढी और परंपरा के नाम से दंगा - फसाद फैला
इंसान को इंसान से लड़वाकर आतंक बढ़ाते हो
आखिर क्यूँ नहीं हम मुसीबत और जरूरत में
इक - दूजे का सहारा बन अडिग रहें मील के पत्थर के समान
इन्सानियत ही तो होती है व्यक्ति की सबसे बड़ी पहचान
क्यूँ रहते हैं हम जानकर भी अपने ज़मीर से अनजान.!!
कब तक देना पड़ेगा हर मोड़ पर इन्सानियत का इम्तिहान!!
कब तक देते रहेंगे मासूम और निर्दोष अपनी जान!!
क्या इन्सानियत से बढ़कर है किसी की आन-बान-शान
कब समझेंगें कि इन्सानियत ही है व्यक्ति की असली पहचान!!
अलका डांगी