कभी ज़ज्बात में बहते हैं
अपनी कमियाँ नजरअंदाज करते हैं
औरों का बराबर हिसाब - किताब रखते हैं
ये मानव भी बड़े अजीब किरदार होते हैं.!
कभी अकेलेपन और तन्हाई की शिकायत करते हैं
कभी संयुक्त और संगठन में रहकर भी एकान्त में जीते हैं
वक़्त की कदर न कर बेहिसाब बर्बाद करते हैं
और समय की कमी की बात करते हैं
ये मानव भी बड़े अजीब किरदार होते हैं.!
मन - मुताबिक हो तो मुस्कराते रहते हैं
नहीं तो ग़म और उदासी के साये में जीते हैं
जीवन - दर्शन और ज्ञान बाँटते फिरते हैं
अपना जीवन चिंता और अपूर्ण के एहसास में व्यतित करते हैं
ये मानव भी बड़े अजीब किरदार होते हैं !
ये अंदर कुछ बाहर कुछ होते हैं
जीवन - भर चेहरों पर अनगिनत मुखौटे पहनते हैं
कभी खुद भी इन सब से अनजान होते हैं
कभी जान बुझ कर सब के लिए ज़िम्मेदार होते हैं
ये हम हैं और हमारे इर्द-गिर्द भी ऐसे कई प्रकार होते हैं
ये मानव भी बड़े अजीब किरदार होते हैं !
अलका डांगी