बेटा - बेटी
दोनों की तुलना कर क्यूँ बसानी किसी के मन में हीन भावना
दोनों की है अपनी स्वतंत्र पहचान
अपने अपने सपनों की दोनों ही भरते उड़ान
अपने गुणों और क़ाबिलियत से दोनों पाते सम्मान
दोनों परिवार की जान है और दोनों माता - पिता का है अभिमान
बेटियाँ घर की रौनक है तो बेटे भी हैं घर की शान
बेटियाँ गौरव बढ़ाती तो बेटे भी बढ़ाते है सम्मान
चंचल चुलबुल होती है बेटियाँ , बिखेरती पूरे घर में अपनी मुस्कान
बेटों की मस्तियाँ और जिंदादिली जीवन बना देती आसान
भावुक होकर भावनाओं में बहती है अगर बेटियाँ
बेटों में अपनी भावनाओं को छुपाने की कला और होता है व्यवहारिक ज्ञान
बेटी हो या बेटा दोनों ही स्वस्थ समाज के हैं आधार
अपनी अपनी जिम्मेदारी निभाकर पूरा करते अपना व्यवहार
कोई नहीं भूलता अपना कर्तव्य और अपने संस्कार
अपनी संस्कृति और जडों से दोनों को होता है उतना ही प्यार
उनकी तुलना करके क्यूँ बसानी किसीके भी मन में हीन भावना
बेटी हो या बेटा क्यूँ किसी को ज्यादा किसी को कम है आँकना
अलका डांगी