अपनी वाणी अपने प्रभाव से मिटा देते
संसार के सारे भ्रम
जीवन सफल हो जाए उनका
जिन्हें मिल जाते सच्चे देव गुरु और धर्म
देव अरिहंत गुरु निग्रंथ और अहिंसा परमो धर्म
देव - गुरु - धर्म ये तीन सिर्फ शब्द नहीं अपितु जीवन के वे अनमोल और अमूल्य रत्न है जिन्हें इनका समागम प्राप्त हो जाए उनका जीवन सफल और आत्मा का कल्याण भी निश्चित ही हो जाता है |
ऐसे तो हमारे प्रथम गुरु हमारे माता-पिता तथा हमारे शिक्षक होते है जो हमें सामाजिक , व्यवहारिक और शैक्षणिक ज्ञान से अवगत कराते हैं | उनका भी हमारे जीवन में बहुत बड़ा उपकार और योगदान होता है परन्तु सच्चे गुरु वही होते हैं जो हमें सच्चे देव और सच्चे धर्म की पहचान कराते हैं | वे ही हमारे जीवन को अधोगति में जाने से बचाते हैं और हमारे जीवन का उद्धार करते हैं | उन्हीं से हमें आत्मज्ञान होता है और सम्यक ज्ञान और सम्यक दृष्टि प्राप्त होती है जिससे हम हमारी मंजिल की और अग्रसर हो कर हमारे जीवन को सार्थक करने में समर्थ होते हैं |
धर्म का मूल विनय और विवेक है जो हर पल हर जीव और हर प्राणी से जुड़ा रहता है परंतु सांसारिक और व्यवहारिक कार्योँ में उलझकर हम इसके सही स्वरूप को देख और समझ नहीं पाते |सच्ची समझ के अभाव में हम बाह्य आडंबर और क्रिया कर्म से आकर्षित होकर उसी को धर्म का रुप दे देते हैं | सच्चे गुरु द्वारा सच्चे धर्म की प्राप्ति होती है और सच्चा धर्म अंगीकार होने पर ही हम अहिंसा के पथ पर चलते हुए अपने जीवन से राग द्वेष और कषाय का निर्मूलन कर कर्मों के बंधन से मुक्त हो सकते हैं |सच्चा धर्म हमें शक्ति और बल प्रदान करता है , हमें कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी विचलित होने से बचाता है और समभाव और सद्भाव में स्थिर रखता है और हमारी आत्मा का कल्याण करता है |
जहाँ सच्चा धर्म है वहीं सच्चे देव का भी वास है | इस संसार में कई देवी-देवता हैं जो पूजे जाते हैं तथा उनकी साधना और भक्ति की जाती है | हम नादान इसी चक्कर में संसार में भटकते रहते हैं परंतु सच्चे देवता का वास हमारी आत्मा में निहित है यह वही समझ सकता है जिसने आत्मा के शुद्ध स्वरूप को पहचान लिया | सच्चे धर्म का देवता भी साथ देते है और कठिन परिस्थितियों में अपने आशिर्वाद की छत्रछाया में सुरक्षित रखते हैं | सच्चे गुरु से सच्चा धर्म प्राप्त होता है और सच्चे धर्म से हमें सच्चे देव के दर्शन प्राप्त हो जाते हैं | सच्चे देव स्वयं भी राग-द्वेष के बंधन से मुक्त होते हैं और हमें भी अपनी आत्मा से परमात्मा के दर्शन कराने और सिद्ध बुद्द और मुक्त होने में सहायक बनते हैं |
गुरू के आशीर्वाद से सम्यक ज्ञान- सम्यक दर्शन और सच्चे धर्म को प्राप्त करते हैं- धर्म अंगीकार कर और कण कण में बसा कर देव की शरण प्राप्त करते हैं और इन सब के आशीर्वाद और छत्रछाया में अपनी आत्मा को सिद्ध बुद्द और भवों भव के फेरों से मुक्त कर सकते हैं |
अलका डांगी