अपने पूर्वाग्रह और मापदंड !
तो तेज तर्राट होगी
बातें भी उसकी बेबाक होगी
fashion का अलग ही अंदाज होगा
disco pub में भी उसका राज होगा
खाना तो बाहर का ही खाती होगी !
अव्वल तो खाना बनाती भी होगी ??
परिवार की क्या कदर होगी ?
संस्कारों से क्या भद्र होगी. ?
यह सोच है अधिकतर बाहर वालों की
तो उन सबके लिए
हाँ हम मुंबई से हैं
पर अपने काम से काम रखते हैं
ना किसी से बेवजह उलझते हैं ना दखल अंदाज करते हैं कपड़ों से मॉडर्न होने का ना दावा करते हैं
ना ही अपनी रहनी करनी पर अकड़ते हैं
आधुनिकता हमारे विचारों में झलकती है
सादगी हमारे दिलों दिमाग में बसती है
हम समय के साथ चलते हैं स्वतंत्रता की मर्यादा भी समझते हैं
और हाँ ये कोई justification नहीं है ना ही सिर्फ mumbai की बात है
ये ऐसा torture है जिससे हर क्षेत्र में किसी न किसी को गुजरना पड़ता है
दूसरों के मापदंड और पूर्वाग्रह से बहुत जुझना पड़ता है
तो किसी को आँकने से पहले उसके जीवन को जी लो
या उनकी जिंदगी और तौर-तरीकों को पहले समझ लो
ना कि किसी की राह में बाधा बनकर उसकी प्रगति को छीन लो
ना संस्कारों का वास्ता देकर किसी को हीन गिन लो
सब इन्सान है इन्सानियत को ही समझ लो
बस जीवन सुन्दर बन जाएगा थोड़ा मन सरल कर लो
अलका डांगी