मेरा शहर !
ऊंची-ऊंची इमारतों का निर्माण आसपास हो रहा है
आम आदमी खुली सड़क और खुले मैदान खोज रहा है
हर गली हर नाके पर सिर्फ शोर हो रहा है
सिर्फ बाहर ही नहीं अब अंतर्मन भी अशान्त हो रहा है
मेरे शहर का यह कैसा विकास हो रहा है
यातायात की सुविधा के लिए मेट्रो के फेज बन रहे हैं
ट्रैफिक से उबरने के लिए ब्रिज पर ब्रिज चढ़ रहे हैं
सुविधा के लिए हर कोई अपनी मुमकिन कोशिश कर रहा है
फिर भी भीड़ पर नियंत्रण खो रहा है
मेरे शहर का यह कैसा विकास हो रहा है
बरसों पुराने हरे-भरे पेड़ कट रहे हैं
सागर का तट भी कहीं खो रहा है
आधुनिकता और विज्ञान का चमत्कार हो रहा है
फिर भी हर कोई धैर्य और संयम की परीक्षा दे रहा है
मेरे शहर का यह कैसा विकास हो रहा है
प्रदूषण का स्तर ऊँचाई छू रहा है
पशु पक्षियों का आवागमन कम हो रहा है
प्रकृति के साथ नित्य नया खिलवाड़ हो रहा है
फिर भी ये शहर हँसते हँसते-हँसते बढ़ती जनसंख्या का बोझ ढ़ो रहा है
मेरे शहर का यह कैसा विकास हो रहा है
अलका डांगी