गुमसुम से बैठे हैं बच्चे हमारे
गैजेटस की दुनिया में कौन इन्हे पुकारे
खिलौने तो है ढेर सारे
पर कब तक खेले इनके सहारे
मित्र, सहेली सब कहा खो गई
मोबाइल और लैपटॉप ही अब उनकी दुनिया हो गई
वो पकडा पकड़ी, छुपाछुपी और लगोरी
और वो रस्सीखींच की जोरा - जोरी
कोई आज इन्हे ये सब भी सिखाए
टीवी मोबाइल से कहीं दूर ले जाए
हकीकत और भ्रम का फर्क इन्हें समझाएँ
कहीं गैजेटस की दुनिया में ये अपना मासूम बचपन न खो जाएँ
अलका डांगी
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