एक नन्ही सी जान थी वो
माता पिता की शान थी वो
मन में बड़े अरमान और सपने थे
उस मासूम के लिए तो सभी अपने ही थे
मायके से विदा हुई थी नयी दुनिया बसाने
नयी उमंग नए विश्वास के साथ हंसने हँसाने
पर जिन्हे अपना समझा था
वो तो निकले बेगाने
किसी से बयान न कर सकी अपने दुख भरे अफसाने
समाज की कुरीतियों के जाल में फँस गयी
एक हसीन चुलबुली बेटी अपने ही ससुराल की बलि चढ़ गयी
हमारी बेटी की कमी तो कभी पूरी न हो पाएगी
पर ऐसे निर्दयी बेरहम इंसानों को ये दुनिया जरूर सबक सिखायेगी
विनीता को समर्पित 🙏
अलका डांगी
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