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Wednesday, April 10, 2019

भाषा का स्वभाव

अभिव्यक्ति का माध्यम है
स्वभाव की परिभाषा
अपना अपना अंदाज है
सबकी अपनी अपनी भाषा
संबंधों को मधुर बनाती
कभी स्वजनों से दूर कराती
व्यंग्य कटाक्ष से ठेस पहुँचाती
हास्य से चेहरों पर मुस्कान बिखराती
हर पल अपना अलग रंग दिखलाती
चंचल चतुर और चालाक भी है भाषा
सीधी, सरल जल्द समझ आती
गोल गोल माया का जाल बनाती
कभी रिश्ते बनाती
कभी चक्रव्यूह में है उलझाती
मगर प्रेम और सत्य से ईश्वर के करीब ले जाती है भाषा
और सबसे मासूम एवं निर्दोष होती है
बच्चों के कोमल मन की भाषा
न माप तौल कर बोली जाती
ना ही किसी का दिल दुखाती
सबके मन को लुभाती
इतनी प्यारी हो सबकी भाषा
विनय विवेक और मिठास से जुड़ी रहे
ना रहे कोई आशा और निराशा
अपना अपना अंदाज
अपनी अपनी भाषा

अलका डांगी 

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