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Saturday, June 19, 2021

दिल की बात

दिल ही दिल में बातें हजार करती हूँ 
लिखकर अपनी भावनाओं का इजहार करती हूँ 
कभी अपनी, कभी गैरों की भावनाओं में इस कदर बहती हूँ 
कि खुशी के नगमें और दर्द ए दिल शब्दों में बयां करती हूँ |

हर पीढ़ी के नजरिए को उनकी दृष्टि से देखने की कोशिश करती हूँ 
जीवन की वास्तविकता के प्रति अपनी समझ पेश करती हूँ 
कभी दिल की बात तो कभी हक़ीक़त दुनिया के सामने रखती हूँ 
शब्दों के तार छू जाए ऐसे दिलों में प्रवेश करती हूँ |

समाज की कुरीतियों और शोषण के खिलाफ 
आवाज उठाने की जुर्रत करती हूँ 
प्रत्यक्ष नहीं, अपने लेखन से सही 
कुछ सकारात्मक बदलाव की मंशा रखती हूँ |

ये प्रकृति की देन है, सरस्वती की कृपा है 
इसकी सदा इज़्ज़त करती हुँ 
कलम की ताकत अनंत है, अटूट है 
इसी विश्वास से लिख रही हूँ और लिखती रहती हूँ |

अलका डांगी 

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