एक सलाम डॉक्टर के नाम !
कोई इन्हें समझे या ना समझे
हर मर्ज समझने में ये बड़े बेमिसाल होते हैं
इनका अनुभव और इनका इलाज -
हर स्वस्थ जीवन की ये ढाल होते हैं |
अपने फर्ज और सेवा में रहते हर वक़्त मगन
मरीज़ की सलामती और संतुष्टि से दूर हो जाती इनकी थकन
कभी अस्पताल ही बन जाता है इनका आशियाना
यहीं इनके तीज-त्यौहार होते हैं
मुश्किल घड़ी में फरिश्ते बन कर
जरूरतमंद के लिए मददगार होते हैं |
कोई भी बीमारी हो या हो कोई महामारी
बिना थके, बिना रुके, दिन - रात करते रहते तिमारदारी
कर्तव्यनिष्ठा से सराबोर होते हैं
ये कर्मवीर भी तारीफ और सम्मान के पूरे हकदार होते हैं |
परिवार से बढ़कर अपने फर्ज को अंजाम देते हैं
आज दिल से इनकी कुर्बानी को चलो मिलकर सलाम देते हैं |
अलका डांगी
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