Followers

Friday, December 20, 2019

संयुक्त और एकल परिवार

Nuclear family! पता नहीं ये शब्द कहाँ से आया और किसने इसकी खोज की पर जिस तरह इसे हीन दृष्टि से देखा जाता है, वो एकल परिवारवालों के दिलों पर चोट करती है संयुक्त परिवार हो या एकल परिवार, परिवार आखि़र परिवार ही होता है |आपसी संबंध, जिम्मेदारियाँ, उतार- चढ़ाव, लड़ाई - झगड़े, ये तो हर एक परिवार का अभिन्न अंग है, तो फिर एकल परिवार को अपनी नजरों से उतार कर संयुक्त परिवार को ही महत्व क्यूँ दिया जाता है?

कोई नहीं चाहता की वो अपने घर-परिवार से दूर अकेला रैन बसेरा करे | जब आदमी उच्च शिक्षण, नौकरी या व्यापार के लिये परिवार से दूर बसता है तो इन सबके पिछे कोई वजह होती है | दूर रहकर भी वह अपनी जड़ों से जुड़ा रहता है और समय निकालकर अपने परिवार वालों के साथ समय व्यतीत करने के सपने दिल में संजोए रखता है |

कुछ एक सम्बंध होते है ऐसे जहां माता पिता या किसी अन्य परिवार वालों से मतभेद या अनबन हो जाती है और सबकी सुख - शांति के लिए व्यक्ति चला जाता है अकेला अपना निर्वाह करने पर उसे भी अपने दिल पर पत्थर रख कर ऐसा करना पड़ता है

संयुक्त परिवार में जिम्मेदारियां बंट जाती है, सुख - दुख में एक दूसरे का सहारा मिल जाता है, बच्चे बड़े हो जाते सुख दुख में मिलकर   रहना सीखते  हैं , सगाई और शादी जैसे महत्वपूर्ण काम संपूर्ण रीति रिवाज और बिना किसी रुकावट के  संपन्न हो जाते हैं , एक ही आदमी को सारा बोझ नहीं उठाना पड़ता है |

वहीं एकल परिवार में घर - परिवार की जिम्मेदारी अकेले ही निभानी पड़ती है चाहे वो बच्चों  को पढ़ा लिखा कर बड़ा करना हो या कोई सुख दुख का समय हो.. और  पूरी जिंदगी ये सिद्ध करने में गुजर जाती है की हम भी परिवार से उतना ही प्यार करते हैं और उतना ही साथ रहना पसंद करते हैं बस फर्क़ इतना है कि हम दूर हैं इसलिए आप यहाँ आकर हमारे साथ रहना पसंद कम करते हैं और हम चाहकर भी साथ नहीं रह सकते 

ये बात और है कि दोनों परिवार में रहने वालों के अपने अपने अलग दृष्टिकोण है परंतु हमेशा तव्वजो संयुक्त परिवार वालों को ही मिलती है 

काश ये बात भारत की संस्कृति में रहने वालों को समझ आये और परिवार को एकल और संयुक्त की नजरों से तोलना बंद कर दें 


अलका डांगी 

Thursday, December 19, 2019

जिद्द

कुछ कर गुजरने की मन में ग़र जिद्द होती है
उसकी न कोई सीमा न कोई हद्द होती है 
दिल में यदि ग़र ये चाहत होती है 
उसे पूरा करने के लिए बेइंतहा मेहनत होती है 
और वो भी बेहिसाब, बेहद होती है 
संघर्ष करके ही तो आखिर 
मंजिल हासिल होती है 
जिसे पाने के लिए ये सारी 
जद्दोजहद होती है 
उसे पूरा करने की
खुशी भी अनहद होती है 
क्यूँ कि कुछ कर गुजरने की 
मन में जिद्द होती है 

अलका डांगी 





Sunday, November 24, 2019

बचपन

बचपन 
बच्चे और ये बचपन
कितना सरल होता है इनका जीवन 
रोते हैं तो पल में हँस जाते हैं 
रूठते हैं तो जल्द मन जाते हैं
टूटे हुए दिलों को जोड़ देते हैं 
चंचल, चुलबुले अंदाज से 
चेहरों पर मुस्कान दे जाते हैं 
कितना कोमल होता है इनका मन 
कितना सरल होता है इनका जीवन 
अमीर - गरीब में फर्क नहीं करते 
ऊँच - नीच का भेद नहीं समझते 
सबके संग घुल मिल जाते हैं 
सच्ची - सीधी बात करते हैं 
हर बात में नई बात सीखा जाते हैं 
कितना निर्दोष होता है इनका हर कथन 
कितना सरल होता है इनका जीवन 
कभी शरारत कभी बाल हठ करते 
लड़ते झगड़ते पर छल कपट नहीं करते 
अपने हाल में मस्त रहते 
सही मायने में जीवन जीते 
जीने के कई पाठ पढ़ा जाते हैं 
कितना लुभाता है इनका मस्त मौला पन
कितना सरल होता है इनका जीवन 

अलका डांगी 





Wednesday, October 9, 2019

अमिताभ बच्चन - सदी के महानायक

सदी के महानायक हैं
जिनके लाखों चाहक है
आदमी वो बेमिसाल
कला की है एक मिसाल

अपनी पहचान आप बनाई
मेहनत और लगन से कर के सगाई
इज़्ज़त  और शौहरत खुब कमाई
अपनी छवि ज़न ज़न के  मन में बसाई

जीवन में देखे कई उतार चढ़ाव
थककर लाए नहीं कोई ठहराव
हँसकर पार किया हर पड़ाव
अपने उच्च मनोबल का छोड़ा प्रभाव

बच्चे बुजुर्ग या हो जवान
सभी करते आपका सम्मान
आदर्श हैं आप सभी के
ऐसी आपकी प्रेरणा महान

आपके जन्‍मदिन की देते है ढेरों शुभकामना
आपका प्रेम सदा हम पर रहे यूं ही बना
तन - मन यूँ ही स्वस्थ रहे
जीवन में खुशियाँ आए सौगुना

अलका डांगी

Wednesday, September 25, 2019

पर्यावरण

पर्यावरण की रक्षा में हम भी एक कदम उठाते हैं
चलो मिलकर आज एक पेड़ लगाते हैं

सृष्टि की संरचना को जिंदा रखना है
प्राकृतिक आपदाओं के प्रकोप से बचना है
वर्तमान और भविष्य को उज्जवल करना है
आओ समय रहते चेत जाते हैं
पर्यावरण की रक्षा में हम भी एक कदम उठाते हैं

समय के साथ जरूर चलना है
पर बढ़ते हुए प्रदुषण को नियंत्रण करना है
आधुनिक यंत्र - तंत्र आज की जरूरत है
पर इसकी सीमा - मर्यादा को भी समझना है
इसके पहले की ये हमें हानि पहुंचाते हैं
पर्यावरण की रक्षा में हम भी एक कदम उठाते हैं

पेड़ - पौधें तो पशु - पक्षियों का आशियाना है
फल - फुल और जड़ी बूटियों का खजाना है
इनकी जरूरत को सबने जाना और माना है
हम सबको मिलकर इनका अस्तित्व बचाना है
चलो भावी पीढ़ी के लिए ये सौगात छोड जाते हैं

पर्यावरण की रक्षा में हम भी एक कदम उठाते हैं
चलो मिलकर आज एक पेड़ लगाते हैं

अलका डांगी

Saturday, August 31, 2019

क्षमा

क्षमा वीरों का भूषण है
क्षमा ही बडप्पन है
क्षमा प्रेम का दीप जलाती है
क्षमा संबंधों की मिठास बढ़ाती है

दिल को यदि ठेस पहुंची हो तो
रूठने का पूरा है तुमको हक
पर समझौता दिलों का कर देना
पलने देना न उसमें कोई शक

गलती किसी से भी हो सकती है
चाहे छोटा हो या बड़ा
नजरअन्दाज कर देना सभी 
जिंदगी जीने का है ये फलसफा 

शिकायत हो कोई तो उसे बयान कर देना
रिश्तों की गरिमा को सम्मान दे देना
दिल पर कोई बोझ न रखना
माफी माँग लेना या माफ कर देना

क्यूँ की क्षमा वीरों का भूषण है
क्षमा ही बड़प्पन है
क्षमा प्रेम का दीप जलाती है
क्षमा संबंधों की मिठास बढ़ाती है

अलका डांगी

Monday, August 26, 2019

पर्युषण

संतों का कर लो समागम
कि आया है पर्व पर्युषण
धर्म की कोरी बातें हुईं बहुत
अब कर लो तन - मन - धन समर्पण
कि आया है पर्व पर्युषण

राग - द्वेष से ऊपर उठना है
तप - ध्यान भी दिल से करना है
वीर - वाणी कर लो अर्जन
कि आया है पर्व पर्युषण

संसार में ही न उलझे रहना
आगम का भी सार है समझना
अंतरात्मा का कर लो दर्शन
कि आया है पर्व पर्युषण

संयम के पथ पर चले हर ज़न
छोड़ कर राग - द्वेष और कर्मों का बंधन
सरल हो जाए सबका अंतर्मन
कि आया है पर्व पर्युषण

भवोभव  से मुक्ति मिल जाए
प्रभु - वाणी आत्मसात कर जाए
छु ले प्रभुजी के चरण
कि आया है पर्व पर्युषण

अलका डांगी