विचारों का क्या है ये तो आते जाते रहते हैं
कभी अच्छे कभी बुरे, जहन में हलचल मचाते रहते हैं
सृजनात्मक हो तो अपने साथ सारी सृष्टि का हो जाता है उद्धार
विनाशक बन जाए तो हो जाता है नष्ट - भ्रष्ट समस्त संसार.!
इनकी मर्यादा में ही है सुखी जीवन का सार
कुछ हमारे विचार , कुछ तुम्हारे विचार
व्यक्त करो, कर लो साझा या लो जीवन में उतार
इनको सहजो, या लो फिर इन्हें सँवार
पर जबरन किसी पर थोपते फिरो अपने विचार
नहीं देता है कोई, किसी को भी ये अधिकार !
विचारों में भी शक्ति होती है अपार
सकारात्मक हो तो जीवन हो जाता साकार
नकारत्मक कर देता जीना ही दुश्वार
सोच समझ कर सींचना इन्हें हर बार
आखिर अपने विचारों की नैया के हम ही तो हैं खैवनहार.!
अलका डांगी